
देश में कितनी बेरोजगारी... जॉब का डेटा सच्चा या आंकड़ों की बाजीगरी?
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गुजरात के भरूच से एक वीडियो सामने आया था, जिसमें दिख रहा था कि 10 वैकेंसियों के लिए हजारों युवा पहुंच गए थे. ऐसा ही एक वीडियो मुंबई से भी आया है. ऐसे में जानते हैं कि क्या वाकई देश में बेरोजगारी का संकट बढ़ता जा रहा है? आंकड़े क्या कहते हैं?
मुंबईः एयर इंडिया ने मुंबई एयरपोर्ट पर लोडर के पदों पर वैकेंसी निकाली. वैकेंसी 2,216 पदों के लिए थी, लेकिन इसके लिए 25 हजार से ज्यादा युवा पहुंच गए. इससे एयरपोर्ट के आसपास भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई. जॉब के लिए न्यूनतम योग्यता 10वीं पास थी. लेकिन यहां कई ऐसे युवा थे जिनके पास अच्छी-खासी डिग्री थी. कुछ तो सैकड़ों किलोमीटर दूर से आवेदन के लिए आए थे. लोडर की सैलरी 20 से 25 हजार रुपये महीना होती है.
भरूचः गुजरात के भरूच का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. भरूच के एक होटल में 10 पदों पर वैकेंसी निकली थी, जिसके लिए हजारों युवा पहुंच गए थे. यहां भीड़ के कारण रेलिंग तक टूट गई थी.
मुंबई और भरूच की ये दो घटनाएं बानगी भर हैं. जहां भी नौकरियां निकलती हैं वहां युवाओं की ऐसी भीड़ दिखना आम है. 2018 में यूपी पुलिस में चपरासी के महज 62 पदों पर भर्ती के लिए 93 हजार से ज्यादा उम्मीदवारों ने आवेदन कर दिया था. इनमें से 3,700 के पास पीएचडी, पांच हजार के पास ग्रेजुएशन और 28 हजार के पास पीजी की डिग्री थी. भीड़ की इन तस्वीरों से सवाल उठता है कि क्या भारत बेरोजगारी के चक्रव्यूह में फंस रहा है?
देश की आर्थिक स्थिति पर नजर रखने वाली निजी संस्था सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की रिपोर्ट बताती है कि भारत में इस साल जून के महीने में बेरोजगारी दर 9.2% थी, जो 13 साल में सबसे ज्यादा थी. मई में यही दर 7% थी. गांवों में बेरोजगारी दर 9.3% और शहरों में 8.6% थी.
भारत में सबसे ज्यादा बेरोजगारी पढ़े-लिखे युवाओं में है. हाल ही में इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइजेशन (ILO) की रिपोर्ट बताती है कि 2023 तक भारत में जितने बेरोजगार थे, उनमें से 83% युवा थे.
इतना ही नहीं, दो दशकों में बेरोजगारों में पढ़े-लिखों की हिस्सेदारी लगभग दोगुनी हो गई है. ILO की रिपोर्ट बताती है कि साल 2000 में बेरोजगारों में पढ़े-लिखों की हिस्सेदारी 35.2% थी, जो 2022 तक बढ़कर 65.7% हो गई.

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