
दिल्ली में यमुना ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, बढ़ते जलस्तर से बाढ़ का खतरा, निचले इलाकों में स्कूल बंद
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हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से हर घंटे 1 से 2 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है. 12 जुलाई को आधी रात 1 बजे से लेकर शाम 8 बजे तक हथिनीकुंड बैराज से 30 लाख 70 हजार क्यूसेक से ज़्यादा पानी छोड़ा गया है. इसके चलते पुराना रेलवे पुल पर यमुना का जलस्तर 1978 के रिकॉर्ड को तोड़ चुका है.
क्या 45 साल बाद एक बार फिर राजधानी दिल्ली डूबने वाली है? ये सवाल पिछले दो दिनों से हर किसी के जहन में बना हुआ है. कारण, हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने पर यमुना का रौद्ररूप दिख रहा है. यमुना का जलस्तर बुधवार रात को 208 मीटर को पार गया है. यानी दिल्ली में यमुना नदी खतरे के निशान से करीब 2 मीटर ऊपर बह रही है. बुधवार रात 11 बजे जलस्तर 208.8 मीटर दर्ज किया गया है. सन 1900 के बाद से यह पहली बार है जब यमुना का स्तर 207.49 को क्रॉस कर गया है. इससे पहले 1978 में आखिरी बार यमुना का स्तर सबसे अधिक दर्ज हुआ था. तब ये 207.49 मीटर था, जो अभी तक रिकॉर्ड माना जाता था.
अब अगले 24 घंटे दिल्ली पर काफी भारी हो सकते हैं. सैलाब के रूप में हरियाणा से दिल्ली की ओर खतरा पल-पल बढ़ रहा है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में धारा 144 लागू कर दी गई है. निचले इलाकों में बिगड़ते हालात के बीच एनडीआरएफ ने मोर्चा संभाल लिया है. साढ़े 16 हजार से अधिक लोगों को शिफ्ट किया गया है. गुरुवार सुबह 8 बजे तक पानी का स्तर 208.30 तक पहुंचने की संभावना है.
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हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से हर घंटे 1 से 2 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है. 12 जुलाई को आधी रात 1 बजे से लेकर शाम 8 बजे तक हथिनीकुंड बैराज से 30 लाख 70 हजार क्यूसेक से ज़्यादा पानी छोड़ा गया है. इसके चलते पुराना रेलवे पुल पर यमुना का जलस्तर 1978 के रिकॉर्ड को तोड़ चुका है. 100 वर्षों से अधिक समय में पहली बार दिल्ली में यमुना में इतना पानी बह रहा है.
24 घंटे में हरियाणा से दिल्ली पहुंचता है पानी
आपको बता दें कि हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से जो पानी छोड़ा जाता है, उसको दिल्ली पहुंचने में 24 घंटे का समय लगता है. इसका मतलब ये है कि दिल्ली में खतरा अभी टला नहीं है, क्योंकि पानी आने के सिलसिल लगातार जारी है. इसको लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गृह मंत्री को चिट्ठी भी लिखी है, जिसमें उन्होंने अनुरोध किया है कि संभव हो तो हथिनीकुंड बैराज से और अधिक पानी न छोड़ा जाए.

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