
दिल्ली पुलिस ने लुटेरों के गैंग को पकड़ा, 1.26 करोड़ कैश और 10 लाख का सोना जब्त
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पूछताछ में पता चला कि गिरोह का नाम बॉबी-कृष्ण गुर्जर गैंग है. वे बहुत ही प्रोफेशन तरीके से काम कर रहे थे. उन्होंने गैंग की शुरूआत 4 महीने पहले ही किया था.
दिल्ली पुलिस ने लूट करने वाले एक बड़े गैंग का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने गैंग के 5 सदस्यों को गिरफ्तार भी किया है. आरोपियों के पास से 1.26 करोड़ रुपये कैश, 10 लाख रुपये का सोना, लूटे गए कैश से खरीदी गई 2 स्कूटी, 2 देसी कट्टे व 4 जिंदा कारतूस व अपराध में प्रयुक्त एक बाइक भी बरामद किया है. गिरफ्तार आरोपियों में कृष्ण कुमार उर्फ सचिन, बॉबी वर्मा, शिवम गौर, तरुण सहगल और स्पर्श अग्रवाल शामिल है. पुलिस के मुताबिक, 2 मार्च को गोविंद और नरेंद्र अग्रवाल खुचा महाजनी चांदनी चौक से 1.15 करोड़ रुपये जमा करने स्कूटी से रोहिणी जा रहे थे. वे चंदगी राम अखाड़ा लाल बत्ती पार कर वजीराबाद की ओर बढ़े और मजनू का टीला गुरुद्वारा के पास पहुंचे तो बाइक सवार तीन लोगों ने पीछे से स्कूटी को टक्कर मार दी. इसके बाद स्कूटी फिसलने से गोविंद और नरेंद्र अग्रवाल गिर गए. इसके बाद लुटेरे उनके पास आ गए और बैग छीनने का प्रयास करने लगे. दोनों ने विरोध करने की कोशिश की तो लुटेरों ने पिस्टल निकाल कर 1.14 करोड़ रुपये नकद ले जा रहे बैग को जबरन लूट लिया.
चूंकि लूट दिनदहाड़े की गई थी और लूट की रकम बड़ी थी, इसलिए उत्तर जिले की कई टीमों को सतेंद्र यादव, एसीपी सिविल लाइंस और अक्षत कौशल, एसीपी कोतवाली की देखरेख में मामले को सुलझाने का काम सौंपा गया था. टीमों ने शुरुआत में हाल ही में चांदनी चौक और लाहौरी गेट क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों पर काम करना शुरू किया. सैकड़ों सीसीटीवी की पूरी तरह से जांच की गई और दिल्ली के ट्रांस-यमुना इलाके में कहीं जाने वाले रास्ते को खंगाला गया। इस दौरान चांदनी चौक क्षेत्र से शिकायतकर्ता की आवाजाही के बताए समय पर बिना नंबर प्लेट मोटरसाइकिल पर तीन व्यक्ति को देखा गया. 8-10 किलोमीटर तक आरोपी व्यक्तियों की पहचान करना और उन्हें ट्रैक करना बड़ा मुश्किल था. लेकिन टीम ने पूरे 4 से 5 दिन तक मेहनत की. पुलिस ने कहा- आरोपियों की पहचान करना मुश्किल था...
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों की पहचान करना और मुश्किल था, क्योंकि बाइक का नंबर प्लेट नहीं था. इसके बाद पुलिस टीम ने बहुत व्यवस्थित तरीके से लगातार काम किया. टीम ने आरोपियों के आने-जाने के सभी संभावित रास्तों को खंगाला. सभी संभावित मार्गों पर सीसीटीवी कैमरों की जांच के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया था. इंस्प्र. सिविल लाइंस टीम के एसएचओ अजय कुमार को वारदात में शामिल एक गिरोह का सुराग मिला. लुटेरों द्वारा इस्तेमाल की गई बाइक को देखने के लिए टीम के सदस्य इलाके में घूमते रहते थे. केवल पहचान यह थी कि बाइक काले रंग की थी और अपाचे थी. इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज की तस्वीरों से सुराग निकालने का प्रयास किया गया. संदिग्धों में से एक की पहचान आंशिक रूप से एक व्यवसायी के बेटे के रूप में हुई. इस जानकारी को आगे स्थानीय खुफिया सोर्स के साथ विकसित किया गया. करीब दो दिन के बाद पता चला कि चार दोस्तों ने बड़े जश्न के लिए चार कार्टन शराब खरीदी है. यह भी पता चला है कि वे आम तौर पर एक घर में रोजाना शराब पीने के लिए इकट्ठा होते हैं. इसके बाद ट्रांस यमुना क्षेत्र में एक घर पर छापेमारी की गई और पांच संदिग्धों को पकड़ लिया गया.
आरोपी बॉबी पेशे से था जौहरी
आरोपी बॉबी पेशे से जौहरी है और चांदनी चौक में उसकी ज्वैलरी की दुकान हुआ करती थी. आभूषण की दुकान में कारोबार में घाटा होने के बाद वह एक कपड़े की दुकान पर काम करने लगा. कपड़े की दुकान के मालिक शिवम गौर उर्फ बेबी के पिता थे. कृष्ण कुमार उर्फ सचिन, शिवम गौर उर्फ बेबी, तरुण सहगल उर्फ तन्नी और स्पर्श अग्रवाल बचपन के दोस्त हैं. बॉबी ने बताया कि उसे पैसे की सख्त जरूरत थी और वह जानता था कि कुचा घासीराम मार्केट वह जगह है जहां पैसे का लेनदेन ज्यादा होता है. उसने किशन गुर्जर और उसके दोस्तों को किसी तरह मनाया. इसके बाद साजिश रची गई और वाहन व हथियार समेत संसाधनों की व्यवस्था की गई.
जनवरी, 2022 में पहली डकैती की जिसमें 20 लाख की लूट हुई. इसके बारे में पीएस आई पी एस्टेट में मामला दर्ज किया गया था. डकैती के बाद आरोपियों ने महंगी शराब पीनी शुरू कर दिया और ऐश-मौज के लिए हर तरह की चीजों में लिप्त हो गए. मंदिर में आशीर्वाद के लिए 1 लाख रुपये दान करने की कही थी बात

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