
दक्षिण के द्वार में कब से और कितना पैठी है भाजपा? क्यों अबतक अजेय है दुर्ग
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने कई ऐतिहासिक जीत दर्ज कीं और रिकॉर्ड बनाए हैं. उत्तर भारत से लेकर पूर्वोत्तर तक में बीजेपी जीत का परचम लहरा चुकी है. लेकिन दक्षिण भारत की ओर जाते-जाते बीजेपी का विजय रथ डगमगाने लगता है. हालांकि कर्नाटक इसका अपवाद रहा है. दक्षिण में कैसा है बीजेपी जनाधार? कहां-कहां और किस अनुपात में पार्टी को मिली है कामयाबी. पढ़ें इस रिपोर्ट में.
भारतीय जनता पार्टी ने 2014 में केंद्र की सत्ता हासिल कर इतिहास रच दिया था. इसके बाद से बीजेपी ने देश के अधिकतर राज्यों में या तो अकेले अपने दम पर सरकार बनाई या फिर एनडीए गठबंधन की सरकारें बनीं. लेकिन दक्षिण भारत का दुर्ग जीतने में बीजेपी को अभी तक सफलता नहीं मिल पाई है.
मोदी युग में बीजेपी ने ऐसे कई राज्यों में जीत की पताका लहराई है, जहां पहले कभी पार्टी सत्ता में नहीं रही. जैसे असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में बीजेपी पहली बार अकेले अपने दम पर बहुमत के साथ सत्ता में आई. वहीं, हरियाणा और झारखंड जैसे राज्यों में भी बीजेपी का मुख्यमंत्री गद्दी पर बैठा. हालांकि, इसी दौरान कर्नाटक को छोड़कर बीजेपी दक्षिण भारत के किसी भी राज्य में अपनी पैठ नहीं बना पाई.
दक्षिण भारत देश का ऐसा हिस्सा है, जहां बीजेपी को सत्ता में आने के लिए अभी लंबा सफर तय करना है. यही वह सवाल है जिसके बारे में बीजेपी सोच रही है, जिससे कि न सिर्फ पार्टी का आधार मजबूत हो सके बल्कि लोकसभा चुनाव 2024 में (कर्नाटक को छोड़कर) ठीक-ठाक सीटें भी जीत सके.
इस रिपोर्ट में हमने दक्षिण के छह राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और तेलंगाना में बीजेपी के जनाधार का विश्लेषण किया है. इन राज्यों में बीजेपी के जनाधार पर विश्लेषण के लिए हमने दो बिंदुओं पर फोकस किया है. ये दो बिंदु हैं- पहला इन राज्यों में बीजेपी का वोट शेयर और इन राज्यों की जिन सीटों पर बीजेपी ने चुनाव लड़ा है, वहां पर पार्टी का वोट प्रतिशत.
हम सबसे पहले शुरुआत आंध्र प्रदेश से करेंगे.
आंध्र प्रदेश

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