
तेलंगाना: रामप्पा मंदिर में मल्लिका साराभाई के नृत्य समारोह की नहीं मिली इजाजत, केंद्रीय मंत्री पर आरोप
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यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल तेलंगाना के रामप्पा मंदिर में प्रसिद्ध नृत्यांगना मल्लिका साराभाई को नृत्य समारोह में भाग लेने की अनुमति नहीं मिली. काकतीय हेरिटेज ट्रस्ट की ओर से आरोप लगाया गया कि केंद्रीय संस्कृति मंत्री की ओर से इजाजत नहीं मिली. वहीं मल्लिका साराभाई ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.
यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल तेलंगाना के रामप्पा मंदिर में प्रसिद्ध नृत्यांगना मल्लिका साराभाई को नृत्य समारोह में भाग लेने की अनुमति नहीं मिली. काकतीय हेरिटेज ट्रस्ट के एक अधिकारी ने शनिवार को आरोप लगाया कि केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने मल्लिका साराभाई के नृत्य समारोह की अनुमति नहीं दी.
ट्रस्ट के संस्थापक न्यासी बीवी पापा राव ने कहा कि उनके द्वारा शनिवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया था, लेकिन यह वारंगल शहर में एक अलग स्थान पर था. हालांकि केंद्रीय मंत्री रेड्डी की ओर से इसको लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी.
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राव ने दावा किया कि प्रसिद्ध रामप्पा मंदिर एक यूनेस्को विरासत स्थल है और ट्रस्ट ने मंदिर में "रामप्पा उत्सव" मनाने के लिए लगभग दो महीने पहले अनुमति के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास आवेदन किया था. न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि साराभाई के भाग लेने पर रेड्डी ने कार्यक्रम की अनुमति देने से इनकार कर दिया. वारंगल पहुंचीं नृत्यांगना मल्लिका साराभाई ने कहा कि हिंदुत्व से व्यक्तिगत राजनीतिक विरोध की वजह से उन्हें अनुमति नहीं दी गई, ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है.
12वीं सदी का है प्रसिद्ध रामप्पा टेंपल
बता दें कि वारंगल स्थित यह शिव मंदिर इकलौता ऐसा मंदिर है, जिसका नाम इसके शिल्पकार रामप्पा के नाम पर रखा गया. इतिहास के अनुसार काकतीय वंश के राजा ने इस मंदिर का निर्माण 12वीं सदी में करवाया था. सबसे बड़ी बात यह है कि उस काल में बने ज्यादातर मंदिर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं, लेकिन कई आपदाओं के बाद भी इस मंदिर को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचा है. यह मंदिर हजार खंभों से बना हुआ है.

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