
'तीसरे पक्ष को नहीं करना चाहिए टारगेट,' भारत-अमेरिका की डील पर बोला चीन
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चीन ने भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में रक्षा और वाणिज्यिक समझौतों पर प्रतिक्रिया दी है. चीन ने कहा है कि राज्यों के बीच सहयोग में तीसरे पक्ष को टारगेट नहीं करना चाहिए. देशों के बीच सहयोग क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को कमजोर नहीं करना चाहिए. दरअसल, भारत और अमेरिका के बीच सैन्य विमानों के लिए भारत में जेट इंजन का संयुक्त उत्पादन और सशस्त्र ड्रोन को लेकर डील हुई है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा कई मायनों में खास रही है. भारत और अमेरिका ने दोस्ती और मजबूत होने का दावा किया है. दोनों देशों के बीच कई बड़ी बिजनेस डील भी हुई है. पीएम मोदी की इस यात्रा पर सोमवार को चीनी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया है और तीसरे पक्ष को टारगेट नहीं करने की नसीहत दी है. उन्होंने कहा, हमें उम्मीद है कि संबंधित देश क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता के मामले में क्षेत्रीय देशों के बीच आपसी विश्वास के अनुकूल काम करेंगे.
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि राज्यों के बीच सैन्य सहयोग क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को कमजोर नहीं करना चाहिए, किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाना चाहिए या किसी तीसरे पक्ष के हितों को भी नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए. चीन की यह प्रतिक्रिया भारत और अमेरिका के बीच कई रक्षा और वाणिज्यिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने के कुछ दिन बाद आई है.
'क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को कमजोर नहीं करना चाहिए'
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बीजिंग में कहा, यह चीन की लंबे समय से स्थिति रही है कि राज्यों के बीच सैन्य सहयोग क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को कमजोर नहीं करना चाहिए, किसी तीसरे पक्ष को टारगेट नहीं बनाना चाहिए या किसी तीसरे पक्ष के हितों को भी नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए. वे रूस की एक सरकारी न्यूज एजेंसी के सवाल का जवाब दे रही थीं. उनसे पीएम मोदी की वाशिंगटन की स्टेट विजिट में कई रक्षा और वाणिज्यिक समझौतों के बारे में प्रतिक्रिया मांगी गई थी.
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'भारत और अमेरिकी के बीच हुई बिजनेस डील'

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