
'ताजमहल के बंद कमरों के बारे में पूछने वाले आप कौन होते हैं?', HC ने खारिज की याचिका
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ताजमहल के 22 कमरों की याचिका पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाने की मांग के औचित्य पर सवाल उठाया और याचिकाकर्ता से पूछा कि कमेटी बनाकर आप क्या जानना चाहते हैं?
ताजमहल के 22 कमरों को खोलने की मांग वाली याचिका को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने खारिज कर दिया है. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनाने की मांग के औचित्य पर सवाल उठाया और याचिकाकर्ता से पूछा कि कमेटी बनाकर आप क्या जानना चाहते हैं? कोर्ट ने कहा कि याचिका समुचित और न्यायिक मुद्दों पर आधारित नहीं है.
जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने ताजमहल पर दायर विवाद में गुरुवार को सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता से पूछा कि आप कौन से जजमेंट दिखा रहे हैं. याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कई जजमेंट पेश किए, जिनमें अनुच्छेद 19 के तहत बुनियादी अधिकारों और खासकर उपासना, पूजा और धार्मिक मान्यता की आजादी का जिक्र है.
इस पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने कहा कि हम आपकी दलीलों से सहमत नहीं हैं. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि यह याचिका न्यायसंगत नहीं है, कमरों को खोलने के संबंध में याचिका के लिए ऐतिहासिक शोध में एक उचित पद्धति शामिल होनी चाहिए, इसे इतिहासकारों पर छोड़ देना चाहिए, हम ऐसी याचिका पर विचार नहीं कर सकते हैं.
ताजमहल के 22 कमरों को खोलने की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि आप एक समिति के माध्यम से तथ्यों की खोज की मांग कर रहे हैं, आप कौन होते हैं, यह आपका अधिकार नहीं है और न ही यह आरटीआई अधिनियम के दायरे में है, हम आपकी दलील से सहमत नहीं हैं.
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा, 'मैंने पाया कि यह याचिका आगरा में स्थित ताजमहल के इतिहास के संबंध में एक अध्ययन के लिए एक निर्देश की मांग करती है. दूसरी प्रार्थना ताजमहल के अंदर बंद दरवाजों को खोलने की है. हमारी राय है कि याचिकाकर्ता ने हमें पूरी तरह से गैर-न्यायसंगत मुद्दे पर फैसला देने का आह्वान किया है.'

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