
ढाई दशक से गुजरात की सत्ता में बीजेपी, लेकिन इन 8 सीटों पर कभी नहीं खिला सकी कमल
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गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज है. बीजेपी अपने जीत के सिलसिले को बरकरार रखने की कवायद में है तो कांग्रेस सत्ता में वापसी के लिए बेचैन है. गुजरात में बीजेपी भले ही 27 सालों से काबिज हो, लेकिन आठ विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां पर आजतक कमल नहीं खिल सका है. ऐसे में बीजेपी के लिए यह सीटें चुनौती बनी हुई हैं.
गुजरात को बीजेपी का सबसे मजबूत गढ़ ही नहीं बल्कि सियासी प्रयोगशाला माना जाता है. यहां पिछले 27 साल से बीजेपी सत्ता में है. 2022 के चुनाव में बीजेपी अपनी जीत के सिलसिले को ऐसे ही जारी रखती है तो गुजरात में राज करने के मामले में कांग्रेस को पीछे छोड़ देगी. इसके बावजूद गुजरात की आठ सीटें ऐसी हैं, जहां पर बीजेपी का कमल आजतक नहीं खिला सकी है. ऐसे में देखना है कि बीजेपी इस बार क्या इन आठ सीटों पर जीत का परचम फहरा पाएगी?
गुजरात विधानसभा चुनाव का औपचारिक ऐलान भले ही न हुआ हो, लेकिन सियासी पारा गरम है. बीजेपी गुजरात की सत्ता को बरकरार रखने की कवायद में जुटी है और इस बार 182 सीटों में से 160 प्लस का टारगेट रखा है. ऐसे में बीजेपी के लिए गुजरात की आठ सीटें सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं, जो बोरसद, झगडिया, आंकलाव, दाणीलीमडा, महुधा, गरबाडा और व्यारा विधानसभा हैं. यह सीटें ऐसी हैं, जहां पर बीजेपी के लिए जीत दर्ज करना लोहे के चने के चबाने जैसा है, क्योंकि आजादी के बाद से अभी तक इन सीटों पर उसे जीत नहीं मिल सकी.
बता दें कि महाराष्ट्र से 1960 में अलग होकर अस्तित्व में आए गुजरात में साल 1992 में पहला चुनाव हुआ था. सूबे में कांग्रेस लंबे समय तक सत्ता में रही, लेकिन 1995 के चुनाव में बीजेपी ने जीत दर्ज कर आई तो गुजरात पार्टी के तमाम नए निर्णयों की प्रयोगशाला बन गया. 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से जरूर बीजेपी को चुनौती मिली, लेकिन अपनी सत्ता को बचाए रखने में सफल रही.
हालांकि, ढाई दशक में बीजेपी को पहली बार गुजरात में 100 सीटों से कम मिली थी. बीजेपी इस बार किसी तरह की कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है, जिसके लिए उसका फोकस उन सीटों पर भी है जहां पर अभी तक खाता नहीं खोल सकी है. बीजेपी ने ऐसी आठ सीटों के लिए खास रणनीति बनाई है ताकि वहां पर कमल खिलाकर इतिहास बना सके.
बोरसद सीट गुजरात के आणंद जिले की बोरसद विधानसभा सीट पर बीजेपी कभी जीत दर्ज नहीं कर सकी. बोरसद सीट पर अब तक दो उपचुनाव को मिलाकर कुल 15 बार चुनाव हुए हैं. गुजरात बनने के बाद 1962 में इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी, लेकिन उसके बाद से कांग्रेस का कब्जा है. मोदी लहर में भी भरतभाई सोलंकी कांग्रेस के टिकट पर तीन बार विधायक बने. मौजूदा समय में राजेंद्र सिंह परमार कांग्रेस के विधायक हैं. बीजेपी इस सीट पर कमल खिलने के लिए बेताब है.
झगडिया सीट गुजरात की झगडीया विधानसभा सीट पर 1962 से 2017 तक में 13 बार चुनाव हो चुके हैं. कांग्रेस, जनता दल, जेडीयू और बीटीपी के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी, लेकिन बीजेपी आजतक कमल नहीं खिला सकी. झगडिया सीट पर पिछले 35 सालों से छोटू भाई वसावा जीत दर्ज कर रहे हैं. यह आदिवासी बहुल सीट मानी जाती है और छोटू वसावा आदिवासी समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं. छोटू भाई वसावा सात बार के विधायक हैं और 2017 में उन्होंने बीजेपी के रवजी वसावा को मात दी थी.

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