
ट्रंप ने 19 फरवरी को बुलाई 'गाजा पीस बोर्ड' की मीटिंग, बताया कैसे होगी गाजावासियों की मदद
AajTak
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि 'बोर्ड ऑफ पीस' के सदस्य देश गाजा के लिए 5 अरब डॉलर से ज्यादा सहायता देने की घोषणा करेंगे. बैठक 19 फरवरी को वाशिंगटन में होगी. कुछ देशों ने सुरक्षा बल भेजने का वादा किया है, जबकि भारत ने अभी इसमें शामिल होने को लेकर कुछ तय नहीं किया है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 फरवरी की 'गाजा पीस बोर्ड' की बैठक बुलाई है. उन्होंने बताया कि वह सदस्य देशों के साथ वाशिंगटन में बैठक करेंगे, जहां गाजा के लिए बड़े वित्तीय और सुरक्षा से जुड़े ऐलान किए जाएंगे.
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथसोशल पर लिखा, "19 फरवरी 2026 को मैं वॉशिंगटन में बोर्ड ऑफ पीस के सदस्यों के साथ शामिल होऊंगा, जहां सदस्य देश गाजा की मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण के लिए 5 अरब डॉलर से ज्यादा देने की घोषणा करेंगे."
यह भी पढ़ें: PHOTOS: गाजा में 3-मंजिला इमारत पर इजरायल का घातक एयरस्ट्राइक, कैमरे में कैद हुई खौफनाक तस्वीर
ट्रंप ने यह भी कहा कि सदस्य देशों ने शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स और स्थानीय पुलिस के लिए हजारों कर्मियों की तैनाती का वादा किया है.
'गाजावासियों की मदद के लिए...'
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल पोस्ट में लिखा, "बोर्ड ऑफ पीस में असीम संभावनाएं हैं. पिछले अक्टूबर मैंने गाजा संघर्ष को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए एक योजना जारी की थी और हमारे विजन को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सर्वसम्मति से अपनाया. इसके बाद हमने रिकॉर्ड स्पीड से मानवीय सहायता पहुंचाई और सभी जीवित और मृत बंधकों की वापसी सुनिश्चित की.

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को कहा कि वैश्विक आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को कम करने में मदद करने के लिए अमेरिका जल्द ही टैंकरों में फंसे ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटा सकता है. बेसेंट ने कहा कि प्रतिबंधित ईरानी तेल के वैश्विक आपूर्ति में शामिल होने से अगले 10 से 14 दिनों तक तेल की कीमतें कम रखने में मदद मिलेगी.

ईरान से अमेरिका-इजरायल की लड़ाई की आंच आज और भड़क गई. अपने सबसे बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स पर इजरायल के हमले के जवाब में ईरान ने बीती रात से खाड़ी देशों में कई अहम तेल और गैस के ठिकानों पर हमला किया है. इन हमलों का असर ये है कि आज भारत के समय से दोपहर 3 बजे तक ब्रेंट क्रूड ऑयल 118 डॉलर प्रति बैरल की सीमा को पार कर गया था. इसका असर शेयर बाजार से लेकर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ा है. जहां शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट आयी वहीं सोने-चांदी की कीमतें भी टूट गईं. भारत के शेयर बाजार से आज 12 लाख करोड़ से अधिक की संपत्ति साफ हो गई है. सवाल ये है कि क्या पश्चिम एशिया में अब युद्ध का रुख पूरी दुनिया को चपेट में ले चुका है ? इस बीच पहली बार 12 मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों ने खाड़ी देशों पर ईरान के हमले के खिलाफ बयान जारी किया है. तो उधर राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर कड़ा रुख बरकरार रखने के बावजूद ईरानी गैस फील्ड पर इजरायल के हमले से पल्ला झाड़ा है.

अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि आज ईरान पर अमेरिका अटैक का सबसे बड़ा पैकेज लॉन्च करने जा रहा है. जंग की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे उद्देश्य कभी बदले नहीं हैं और ये जंग राष्ट्रपति ट्रंप की इच्छानुसार खत्म होगा. आज ही ईरान ने अपने स्टैंड को बताते हुए कहा था कि अभी उसका बदला पूरा नहीं हुआ है.

ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग अब अपने सबसे निर्णायक और संभवतः सबसे खौफनाक मोड़ पर पहुंच गई है. आज डोवर एयरफोर्स बेस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन छह अमेरिकी नायकों को अंतिम विदाई दी, जिन्होंने एक विमान हादसे में अपनी जान गंवाई लेकिन इस शोक के बीच, वॉशिंगटन के गलियारों से एक ऐसी खबर आ रही है जो पूरी दुनिया को दहला सकती है. रॉयटर्स की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन अब ईरान में 'बूट्स ऑन द ग्राउंड' यानी थल सेना उतारने पर बेहद गंभीरता से विचार कर रहा है.

मैं श्वेता सिंह सीधे युद्ध भूमि से आपको महायुद्ध के बीसवें दिन की खबर बता रही हूं. कल ईरान की गैस फील्ड पर इजरायल के हमले के बाद लगातार चार खाड़ी देश के ऑयल-गैस डिपो-रिफाइनरी पर बड़ा हमला ईरान ने कर दिया है. ईरान ने सऊदी अरामको और यूएई के टर्मिनल के अलावा कतर के सबसे बड़े गैस टू लिक्वड प्लांट रास लफान पर मिसाइल हमला कर दिया. कतर के इस प्लांट से दुनिया को 20 से 25 प्रतिशत गैस की सप्लाई होती है. वहीं सऊदी अरब के यनबू पोर्ट पर स्थित सैमरेफ ऑयल रिफाइनरी पर हवाई हमला हुआ है.

अमेरिकी अधिकारियों के वॉशिंगटन आर्मी बेस के ऊपर कुछ अनजान ड्रोन देखे जाने बाद वहां हड़कंप मच गया है. इसी बेस पर विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ रहते हैं. अभी तक ये पता नहीं लग पाया है कि ये ड्रोन कहां से आए थे. इसके बाद सुरक्षा और बढ़ा दी गई है. इस पर व्हाइट हाउस में एक बैठक भी हुई है, जिसमें इस बात पर चर्चा हुई है कि इन हालातों से कैसे निपटा जाए.







