
ट्रंप ने रूस-यूक्रेन के बीच सुलह के लिए इस्लामिक देश सऊदी अरब को ही क्यों चुना?
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रूस और अमेरिका के बीच यूक्रेन में युद्ध खत्म करने को लेकर वार्ता हो रही है. सऊदी अरब इस वार्ता की मेजबानी कर रहा है लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि वो खुद को मध्यस्थ के रूप में भी पेश कर सकता है. यह दिखाता है कि क्राउन प्रिंस एमबीएस के नेतृत्व में सऊदी सॉफ्ट पावर बनता जा रहा है.
रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री आज रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मिल रहे हैं. दोनों नेताओं की यह मुलाकात सऊदी अरब में हो रही है. इस संबंध में रूसी राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि सऊदी अरब अमेरिका और रूस, दोनों देशों की वार्ता के लिए एक अनुकूल जगह है. पेस्कोव की यह टिप्पणी सऊदी अरब के वास्तविक शासक क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) की जीत मानी जा रही है.
क्राउन प्रिंस सलमान तेल पर आधारित सऊदी की अर्थव्यवस्था और इसके कट्टरपंथी इस्लामिक अतीत को ऐसे राष्ट्र में बदलने के मिशन पर हैं जो दुनिया भर में सॉफ्ट पावर बनकर उभरे. और वो इस मिशन में कामयाब होते दिख रहे हैं.
बढ़ रहा सऊदी अरब का सॉफ्ट पावर
अमेरिका और रूस के नेताओं की मेजबानी कर सऊदी अरब यह भी दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वो गाजा के भविष्य पर भी वार्ता की मध्यस्थता कर सकता है.
एक सऊदी अधिकारी ने अमेरिकी टीवी नेटवर्क सीएनएन को बताया कि मंगलवार को अमेरिका और रूस के बीच होने वाली बैठक में सऊदी अरब मेजबानी से आगे बढ़कर मध्यस्थता की भूमिका निभा सकता है. सऊदी टीम का नेतृत्व देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार करेंगे.
सऊदी अरब के टिप्पणीकार अली शिहाबी कहते हैं, 'मुझे नहीं लगता कि ऐसी कोई और जगह है जहां के नेता का ट्रंप और पुतिन दोनों के साथ इतने अच्छे व्यक्तिगत संबंध हैं. सऊदी अरब के लिए यह एक प्रतिष्ठित आयोजन और यह क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सऊदी की सॉफ्ट पावर को बढ़ाता है.'

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