
ट्रंप को BRICS पसंद नहीं, पुतिन को QUAD... भारत कैसे बनाएगा इन दोनों के बीच बैलेंस?
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भारत एक तरफ चीन और रूस के साथ ब्रिक्स का सदस्य है तो दूसरी तरफ अमेरिका के साथ क्वाड का सदस्य भी है. ये दोनों ही गुट एक-दूसरे के विरोधी है लेकिन भारत इन दोनों का ही सदस्य है. भारत ने बड़ी ही चतुराई से दोनों गुटों के बीच संतुलन बना रखा है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत की सदस्यता वाले ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका) को लगातार टैरिफ की चेतावनी देते रहे हैं. हाल ही में उन्होंने कहा है कि अगर ब्रिक्स देश वैश्विक व्यापार के लिए डॉलर के बजाए किसी अन्य मुद्रा का इस्तेमाल करते हैं तो अमेरिका उनके खिलाफ 100 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा.
ट्रंप ने ब्रिक्स देशों को टैरिफ की धमकी देते हुए कहा कि वो दिन चले गए जब ब्रिक्स देश डॉलर से दूरी बनाने की कोशिश करते थे और अमेरिका तमाशाबीन बना रहता था.
ट्रंप की यह धमकी ब्रिक्स के अन्य देशों की तरह ही भारत के लिए भी चिंता की बात है जो डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने की सोच रहा है. भारत अपनी मुद्रा रुपया के अंतरराष्ट्रीयकरण के लिए श्रीलंका, मलेशिया, रूस, सिंगापुर जैसे देशों के साथ रुपये में व्यापार की तरफ तेजी से आगे बढ़ रहा है.
पिछले साल रूस के कजान शहर में आयोजित ब्रिक्स देशों की बैठक में रूसी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स की एक नई करेंसी लाने पर जोर दिया था. अमेरिका ने इसे डॉलर के प्रभुत्व को कम करने की एक कोशिश की तरह देखा और तब से ही ट्रंप ब्रिक्स को टैरिफ की धमकी दे रहे हैं.
टैरिफ धमकी के बीच अमेरिका से कैसे बैलेंस बनाएगा भारत?
विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप की टैरिफ की धमकी के निशाने पर रूस और चीन खासकर चीन है जो अमेरिका का सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी है. रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस पर लगे प्रतिबंधों के कारण वो डॉलर में व्यापार नहीं कर पा रहा था. इसे देखते हुए चीन ने रूस से उसकी मुद्रा रूबल में ही तेल खरीदना शुरू कर दिया. चीन और रूस के बीच बाकी चीजों का व्यापार भी काफी बढ़ा है और इस व्यापार के लिए दोनों देश स्थानीय मुद्राओं में भुगतान करते हैं.

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