
ट्रंप के टैरिफ से घबराया ये मुस्लिम बहुल देश! अमेरिका से आयात को लेकर कर दी ऐसी घोषणा
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ट्रंप ने मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया पर 32% का टैरिफ लगाने की घोषणा की है. इस टैरिफ से बचने के लिए इंडोनेशिया पूरी कोशिश कर रहा है और अब उसने कहा है कि अमेरिका के साथ व्यापार में उसे हो रहे व्यापार घाटे को कम किया जाएगा. इसके लिए इंडोनेशिया ने अमेरिका से आयात बढ़ाने की बात कही है.
दुनिया के देशों से व्यापार में होने वाले घाटे को कम करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो टैरिफ की घोषणा की थी, अब उसका सकारात्मक नतीजा निकलता दिख रहा है. बहुत से देशों की तरह इंडोनेशिया भी अमेरिका को निर्यात तो बहुत ज्यादा करता है लेकिन अमेरिका से उसका आयात काफी कम है. ट्रंप ने एशिया के मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया पर 32% रेसिप्रोकल टैरिफ की घोषणा थी जो कि 9 अप्रैल से लागू होने वाला था. लेकिन अब इसके लागू होने पर 90 दिनों की रोक लगा दी गई है. इस टैरिफ को लागू होने से रोकने के लिए इंडोनेशिया पूरी कोशिश कर रहा है और उसने घोषणा की है कि वो अमेरिका से आयात बढ़ाएगा.
टैरिफ पर बातचीत के लिए अमेरिका पहुंचे इंडोनेशिया के चीफ इकोनॉमिक मिनिस्टर एयरलंगा हार्टार्टो (Airlangga Hartarto) ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि इंडोनेशिया अमेरिका से खाने-पीने और अन्य तरह की वस्तुओं का आयात बढ़ाएगा. उन्होंने कहा है कि इंडोनेशिया वर्तमान में जिन देशों से आयात करता है, उसे कम करेगा और उसकी भरपाई अमेरिकी सामानों से की जाएगी.
एयरलंगा इंडोशिया के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ट्रंप के टैरिफ पर बात करने के लिए अमेरिका पहुंचे हैं. हालांकि, अन्य देशों की तरह ही अमेरिका जा रहे इंडोनेशियाई सामानों पर भी 10% का बेस टैरिफ लग गया है.
इंडोनेशिया ने प्रस्ताव दिया है कि वो अमेरिका से अपना आयात 19 अरब डॉलर से भी ज्यादा बढ़ाएगा जिसमें 10 अरब डॉलर की ऊर्जा खरीद शामिल होगी. उसका कहना है कि इस उपाय से अमेरिका से उसका व्यापार असंतुलन कम होगा जिससे वो ट्रंप के टैरिफ से बच जाएगा.
इंडोनेशियाई मंत्री ने कहा, 'इंडोनेशिया अमेरिका से कृषि उत्पादों जैसे गेहूं, सोयाबीन, सोयाबीन से बने उत्पाद और अन्य सामान खरीदने की योजना बना रहा है.'
उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग पर भी बात करेगा और अमेरिका के बागवानी उत्पादों की खरीद की प्रक्रिया को भी आसान करेगा. मंत्री ने कहा, 'इंडोनेशिया में काम करने वाली अमेरिकी कंपनियों को हम सुविधा देंगे, उनके परमिट और इंसेंटिव की व्यवस्था करेंगे.'

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