
झारखंड में विरासत की सियासत, दो दर्जन से अधिक सीटों पर नेता पुत्रों-पुत्रियों और पत्नियों की एंट्री, 8 का डेब्यू
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झारखंड के चुनाव में कई नेता पुत्र-पुत्रियां, पत्नियां और पुत्रवधु अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. करीब दो दर्जन सीटों पर विरासत के सहारे सियासत में उतरे नेता विधानसभा पहुंचने के लिए किस्मत आजमा रहे हैं.
सियासत और विरासत का नाता पुराना है. राज्य और दल के साथ इसके रूप जरूर बदलते रहते हैं. कहीं इसके पीछे काबिलियत और संगठन में काम करने के तर्क और लोकप्रियता के आधार पर टिकट देने के तर्क दिए जाते हैं तो कहीं जिताऊ उम्मीदवार बताकर इस पर पर्देदारी की जाती है. हर दल की यही कहानी है और यह कहानी एक नए कलेवर में देखने को मिल रही है झारखंड के विधानसभा चुनाव में.
झारखंड चुनाव में सत्ताधारी इंडिया ब्लॉक की अगुवाई कर रही झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) हो या विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), हर दल ने विरासत की सियासत पर खूब भरोसा किया है. दोनों ही दलों, गठबंधनों से कुछ नेता पुत्र-पुत्री-पत्नी-पुत्रवधु की एंट्री हो रही है तो विरासत वाले कुछ पुराने चेहरे भी चुनाव मैदान में उतर चुके हैं.
इस बार के चुनाव में सियासी विरासत वाले आठ चेहरे चुनावी डेब्यू कर रहे हैं जिनमें से पांच बीजेपी के उम्मीदवार हैं. जेएमएम से दो और कांग्रेस ने इस कैटेगरी से एक नेता को टिकट दिया है.
इनका हो रहा चुनावी डेब्यू
झारखंड के इस चुनाव में बीजेपी के टिकट पर पांच नेताओं का चुनावी डेब्यू हो रहा है. इनमें पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन का नाम प्रमुख है. चंपाई सोरेन जेएमएम से बगावत कर हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए थे. बाबूलाल सोरेन घाटशिला विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे हैं. बीजेपी ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास की पुत्रवधु पूर्णिमा दास साहू को जमशेदपुर पूर्व, तीन बार के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की पत्नी मीरा मुंडा को भी पहली बार चुनाव मैदान में उतारा है.
बीजेपी के टिकट पर शत्रुघ्न महतो और तारा देवी भी चुनावी डेब्यू करने जा रहे हैं. शत्रुघ्न महतो तीन बार के बीजेपी विधायक डुल्लू महतो के बड़े भाई हैं और पार्टी ने उनको बाघमारा सीट से उम्मीदवार बनाया है. तारा देवी निवर्तमान विधायक इंद्रजीत महतो की पत्नी हैं. बीजेपी ने तारा देवी को सिंदरी विधानसभा सीट से टिकट दिया है.

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