
झारखंड में चुनाव जीतकर भी कांग्रेस का क्यों हो गया जम्मू-कश्मीर वाला हाल?
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झारखंड विधानसभा चुनाव में इंडिया ब्लॉक को बड़ी जीत मिली है. आदिवासी बाहुल्य राज्य में चुनाव जीतकर भी कांग्रेस का जम्मू कश्मीर वाला हाल हो गया है. जानिए क्यों?
झारखंड विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की अगुवाई वाले इंडिया ब्लॉक को 56 विधानसभा सीटों पर जीत मिली है. 81 सदस्यों वाली झारखंड विधानसभा में बहुमत के लिए जादुई आंकड़ा 41 सीटों का है. बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा भी पेश कर दिया है. हेमंत सोरेन ही सीएम होंगे, इसमें भी कोई शक-सुबहा नहीं है लेकिन सरकार की तस्वीर क्या होगी? यह नतीजे आने के तीन दिन बाद तक स्पष्ट नहीं है. जेएमएम की अगुवाई वाली सरकार में कांग्रेस पावरफुल भागीदारी चाह रही है.
झारखंड की नई हेमंत सोरेन सरकार में कांग्रेस ने डिप्टी सीएम पद मांगा था लेकिन बात नहीं बनी. जेएमएम ने डिप्टी सीएम पद देने से इनकार कर दिया तो पार्टी चार मंत्री पद की मांग पर आ गई. कांग्रेस चार मंत्री पद के लिए तोलमोल में जुटी है लेकिन झारखंड विधानसभा की ताजा तस्वीर को देखते हुए यह भी मुश्किल माना जा रहा है. कांग्रेस के नेता जेएमएम से तोलमोल करने में जुटी है लेकिन पार्टी की बार्गेन पावर को देखते हुए चर्चा तो यह तक शुरू हो गई है कि झारखंड में भी कांग्रेस का हाल जम्मू कश्मीर वाला हो गया है. ऐसा क्यों कहा जा रहा है, इसे समझने से पहले ये जान लेना भी जरूरी है कि जम्मू कश्मीर में कांग्रेस का क्या हाल हुआ?
जम्मू कश्मीर में क्या हुआ था?
जम्मू कश्मीर की चर्चा इसलिए हो रही है कि वहां सत्ताधारी गठबंधन की जीत के बाद विधानसभा की तस्वीर कुछ ऐसी बनी कि नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार बनाने और चलाने के लिए कांग्रेस पर निर्भर नहीं रही. नतीजा ये हुआ कि कांग्रेस तमाम प्रयासों के बावजूद सरकार गठन के दिन तक मनमाफिक कैबिनेट बर्थ नहीं ले पाई और अंत में सरकार में शामिल न होकर बाहर से समर्थन करने का ऐलान कर दिया. नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता भी यह कह चुके हैं कि कांग्रेस सरकार में शामिल नहीं हैं. जम्मू कश्मीर चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस 42 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी जबकि कांग्रेस के छह विधायक जीते थे.
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लेफ्ट के एक और आम आदमी पार्टी के एक विधायक के साथ ही चार निर्दलीय विधायकों के समर्थन से ही नेशनल कॉन्फ्रेंस नंबरगेम में 48 सीटों तक पहुंच गई जो जरूरी जादुई आंकड़ा भी है. जम्मू कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार कांग्रेस के समर्थन के कांग्रेस उसके लिए जरूरी या मजबूरी नहीं रही. नेशनल कॉन्फ्रेंस की कांग्रेस पर निर्भरता खत्म हो जाने का नतीजा ये हुआ कि ग्रैंड ओल्ड पार्टी की बार्गेनिंग पावर कमजोर हुई और उसे चुनाव पूर्व गठबंधन के बावजूद सरकार को बाहर से समर्थन का ऐलान करना पड़ा.

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