
जयराम का उदय, सुदेश का सूरज अस्त... झारखंड में यूथ पॉलिटिक्स की नई बयार!
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JLKM vs AJSU in Jharkhand Polls: जेएलकेएम ने राज्य की 71 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे और उसे जीत सिर्फ एक सीट पर मिली. लेकिन उसने कम से कम 14 सीटों पर चुनाव परिणाम प्रभावित किया, जिसका बड़े पैमाने पर इंडिया ब्लॉक को फायदा हुआ. दूसरी ओर, कुर्मी समुदाय (ओबीसी) का प्रतिनिधि होने का दावा करने वाली ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU) पार्टी ने भाजपा के साथ गठबंधन में 10 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 231 वोटों के मामूली अंतर से केवल एक सीट जीतने में सफल रही.
झारखंड विधानसभा चुनाव परिणाम ने ऐसा लगता है कि राज्य में ओबीसी कुर्मी समुदाय के नए चेहरे के रूप में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के प्रमुख जयराम महतो उर्फ 'टाइगर' पर मुहर लगा दी है. जेएलकेएम ने राज्य की 71 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे और उसे जीत सिर्फ एक सीट पर मिली. लेकिन उसने कम से कम 14 सीटों पर चुनाव परिणाम प्रभावित किया, जिसका बड़े पैमाने पर इंडिया ब्लॉक को फायदा हुआ.
दूसरी ओर, कुर्मी समुदाय (ओबीसी) का प्रतिनिधि होने का दावा करने वाली ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU) पार्टी ने भाजपा के साथ गठबंधन में 10 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 231 वोटों के मामूली अंतर से केवल एक सीट जीतने में सफल रही. आजसू के लिए सबसे बड़ा झटका सिल्ली निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी प्रमुख सुदेश महतो की हार रही. चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद जयराम महतो (JLKM) और सुदेश महतो (AJSU) के बयानों से दोनों नेताओं के आत्मविश्वास में विरोधाभास स्पष्ट दिख रहा था. डुमरी निर्वाचन क्षेत्र से झामुमो की बेबी देवी को हराने वाले 29 वर्षीय जयराम महतो ने कहा, 'सपने देखना चाहिए और युवाओं को बड़े सपने देखने चाहिए… विधायक बनने से मेरे साथ-साथ युवाओं के लिए भी रास्ते भी खुल गए हैं.' मीडिया को संबोधित करते हुए सुदेश महतो ने कहा, 'हम लोगों द्वारा दिए गए जनादेश का सम्मान करते हैं और हेमंत सोरेन जी को बधाई देते हैं. हम अपनी पार्टी और एनडीए के भीतर इस चुनाव परिणाम की समीक्षा करेंगे.'
जयराम महतो राज्य में 'झारखंड का लड़का' जैसे उपनाम से लोकप्रिय हैं. डुमरी में जयराम को 94,496 वोट मिले और उन्होंने बेबी देवी को 10,945 वोटों के अंतर से हराया. आजसू पार्टी की यशोदा देवी 35,890 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहीं. डुमरी सीट कभी झामुमो और उसके नेता जगरनाथ महतो का गढ़ थी, जो झारखंड के गठन के बाद से इस निर्वाचन क्षेत्र से एक भी चुनाव नहीं हारे. कोविड संक्रमण के कारण जगरनाथ की मृत्यु के बाद, यह सीट उनकी पत्नी बेबी देवी के पास थी, जिन्होंने 2023 के उपचुनाव में यहां से जीत हासिल की थी.
इस चुनाव में डुमरी सीट पर विभिन्न जातियों के युवाओं के साथ कुर्मी आबादी जयराम महतो के पीछे लामबंद होती दिख रही है. झारखंड के कुल मतदाताओं में कुर्मी समुदाय की हिस्सेदारी 15% है. 2011 की जनगणना के आंकड़ों से परिचित सूत्रों के मुताबिक राज्य में ओबीसी कुर्मी आबादी 8.6% है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 'झारखंड की 4 करोड़ की अनुमानित आबादी को देखते हुए, 8.6% पर भी राज्य में कुर्मी समुदाय 34 लाख बैठती है, और उनमें से 20 लाख वोट देने के लिए पात्र होंगे. इस तरह कुर्मी वोटों का किसी एक पार्टी या उम्मीदवार के पक्ष में झुकाव चुनावों पर असर डाल सकता है. जयराम महतो ने कई निर्वाचन क्षेत्रों में कुर्मी समुदाय को अपने पक्ष में लामबंद करने में सफलता पाई है.'
सिल्ली विधानसभा क्षेत्र में ऑल झारखण्ड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU) पार्टी प्रमुख सुदेश महतो झामुमो के अमित महतो से 23,867 मतों के अंतर से हार गए. सुदेश की हार और अमित की जीत भी निर्वाचन क्षेत्र में जेएलकेएम के प्रदर्शन से जुड़ी है, जहां उसके उम्मीदवार देवेंद्र नाथ महतो को 41,725 वोट मिले. जेएलकेएम ने विधानसभा चुनाव में 71 उम्मीदवार उतारे, जिसमें जयराम दो सीटों - डुमरी और बेरमो से चुनाव लड़ रहे थे. डुमरी की लड़ाई में जहां झामुमो को नुकसान हुआ, वहीं बेरमो की लड़ाई में झामुमो की सहयोगी कांग्रेस को फायदा हुआ.
बेरमो में जयराम को 60,871 वोट मिले और वह कांग्रेस के कुमार जयमंगल से 29,375 वोटों के अंतर से हार गए, जबकि भाजपा के रविंदर पांडे 58,352 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे. बेरमो की तरह, जेएलकेएम ने कई निर्वाचन क्षेत्रों में वोट काटे, जिससे बड़े पैमाने पर इंडिया ब्लॉक को फायदा हुआ और बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को नुकसान उठाना पड़ा. कम से कम 13 सीटों - सिल्ली, बोकारो, गोमिया, गिरिडीह, टुंडी, इचागढ़, तमाड़, चक्रधरपुर, चंदनक्यारी, कांके, छतरपुर, सिंदरी और खरसावां में- जेएलकेएम को मिले वोट जीत के अंतर से अधिक थे.

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