
जम्मू-कश्मीर: उधमपुर में CRPF के काफिले पर आतंकी हमला, एक जवान शहीद, एनकाउंटर जारी
AajTak
जम्मू कश्मीर के उधमपुर में आतंकियों ने सीआरपीएफ की पेट्रोलिंग टीम पर हमला किया है, जिसमें एक जवान के शहीद होने की जानकारी सामने आई है. बताया जा रहा है कि जवान टीम को लीड कर रहे थे, जब आतंकियों ने घात लगाकर उन पर हमला कर दिया. वह घायल हो गए थे लेकिन बाद में उन्हें शहीद घोषित कर दिया गया.
जम्मू कश्मीर के उधमपुर में एक बार फिर आतंकी हमला हुआ है. यहां सीआरपीएफ की पेट्रोलिंग टीम पर आतंकियों ने घात लगाकर हमला कर दिया. इस हमले में एक सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए हैं.
बताया जा रहा है कि सीआरपीएफ और पुलिस की टीम पेट्रोलिंग पर निकली थी, जब आतंकियों ने हमला किया. जवान टीम के आगे थे, जिनपर आतंकियों ने हमला कर दिया और वह शहीद हो गए.
यह भी पढ़ें: कांग्रेस में 'घर वापसी' से गुलाम नबी आजाद का इनकार, चुनाव लड़ने की तैयारी में सांसद राशिद का भाई... जम्मू-कश्मीर में बढ़ा सियासी पारा
पुलिस चौकी से 8 किलोमीटर की दूरी पर हमला
यह चौकी उधमपुर के डुडू इलाके में पुलिस चौकी से करीब आठ किलोमीटर दूर है. यह चौकी जम्मू के पहाड़ी इलाकों में आतंकवाद विरोधी नए कदमों के तहत स्थापित की जा रही थी. मसलन, बीते हमलों को देखते हुए सरकार ने इन क्षेत्रों में पेट्रोलिंग बढ़ाने और कड़ी निगरानी रखने का आदेश दिया था.
जवानों ने इलाके को घेरा, आतंकियों की तलाश

77वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान दिल्ली-NCR की हवाई सुरक्षा पूरी तरह हाई अलर्ट पर रही. भारतीय वायुसेना के इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस ग्रिड ने परेड से लेकर बीटिंग रिट्रीट तक हर गतिविधि पर नजर रखी. सेना, नौसेना, दिल्ली पुलिस, SPG और NSG समेत कई एजेंसियों के समन्वय से राजधानी के आसमान को सुरक्षित रखा गया.

NATO बिना अमेरिका के युद्धाभ्यास कर रहा है. यानी अब वर्ल्ड ऑर्डर बिना अमेरिका के तय हो रहा है और इसे बर्दाश्त करना उसके लिए मुश्किल हो रहा है. इसलिए अमेरिका अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए किसी को टैरिफ की धमकी दे रहा है, किसी को युद्ध की धमकी दे रहा है.अब अमेरिका ने ईरान पर हमला ना करने के बदले अपनी कई शर्तें मानने की चेतावनी दी है. ऐसे में सवाल है क्या अमेरिका अपने वर्चस्व को बरकरार रखने के लिए कोई बड़ा कदम उठा सकता है? देखें ब्लैक एंड व्हाइट.

देश की सर्वोच्च अदालत ने UGC के नए नियमों से सामान्य वर्ग को नफरती करके फंसाए जाने की आशंका को गंभीरता से लिया है. कॉलेज कैंपस में भेदभाव रोकने के नाम पर 13 जनवरी के नियमों को सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है. इसके बाद सामान्य वर्ग की राजनीतिक ताकत और इस मुद्दे के व्यापक मायनों पर चर्चा तेज हो गई है. जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए इन नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक ने इसके भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं.










