
जमानत या FIR रद्द के लिए करेंगे अपील...? मारपीट मामले में घिरे केजरीवाल के PA विभव के पास क्या हैं विकल्प
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दिल्ली सीएम आवास में आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ बदसलूकी का मामले तूल पकड़ता जा रहा है. पुलिस ने आरोपी विभव कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और शुक्रवार को स्वाति के मजिस्ट्रेट के सामने सीआरपीसी की धारा 164 के तहत बयान दर्ज करवाए गए हैं.
आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से मारपीट मामले में शुक्रवार को नए-नए घटनाक्रम सामने आए हैं. सबसे पहले इस संबंध में मालीवाल ने मजिस्ट्रेट के सामने अपना बयान दर्ज कराया. इसके बाद 13 मई की इस घटना का मालीवाल का एक कथित वीडियो सामने आया है.
अब एक तरफ तो स्वाति मालीवाल का ये वीडियो सामने आया है तो दूसरी ओर सीएम अरविंद केजरीवाल के पीए विभव के सामने भी बड़ी मुश्किलें खड़ी हो चुकी हैं. उनके खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है और इसके बाद अब विभव पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. सवाल उठता है कि जब एक तरफ स्वाति मालीवाल एक्टिव मोड में हैं और लगातार आरोप लगा रही हैं, तो वहीं इस मामले में मुख्य आरोपी विभव के पास क्या-क्या ऑप्शन हैं.
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देखा जाए तो विभव अब ये दो कदम उठा सकते हैं, जो कि प्रत्याशित भी हैं...
1.अग्रिम जमानत के लिए आवेदन- सीआरपीसी की धारा 438 के तहत मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए विभव अग्रिम जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं. अदालत आम तौर पर यह मंजूरी देगी यदि उसे विश्वास हो कि आरोपों में हेरफेर किया गया है या यदि आरोपी के फरार होने का कोई जोखिम नहीं है.
2. एफआईआर को रद्द करने के लिए फाइल - यदि विभव को लगता है कि एफआईआर में लगाए गए आरोप निराधार या तुच्छ हैं, तो वह सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अपने खिलाफ एफआईआर को रद्द करने के लिए भी अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं. यदि अदालत आश्वस्त हो जाए कि इसे दायर करने का कोई आधार नहीं है तो अदालत एफआईआर को रद्द कर सकती है. हाई कोर्ट इस शक्ति का प्रयोग संयमित ढंग से और आम तौर पर उन परिदृश्यों में करता है जहां एफआईआर को झूठा साबित करने वाले पर्याप्त सबूत हों.

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