
छत्तीसगढ़: पशु-मानव संघर्ष में 500 से ज्यादा मौतें, जानिए इसके पीछे कौन सी वजहें जिम्मेदार
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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2019 से 2023 के बीच सूबे में जंगली जानवरों के हमलों में 250 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जबकि 84 लोग घायल हुए हैं. दरअसल, इस दौरान फसलों को नुकसान पहुंचाने की 60 हजार से ज्यादा घटनाएं हुई हैं.
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के जशपुर में दो दिन में जंगली हाथियों के जानलेवा हमले में चार लोगों की जान चली गई, जिनमें से तीन एक ही परिवार के थे. इस घटना के बाद सूबे में मानव-पशु संघर्ष का अहम लेकिन कम चर्चित मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है. छत्तीसगढ़ के जंगलों में रहने वाले आदिवासी लोगों की मौतों के पीछे एक बड़ी वजह पशु-मानव संघर्ष है. दरअसल, सरगुजा संभाग के अंबिकापुर में ही हाथियों ने 40 लोगों को मार डाला है. ये लोग संवेदनशील गांवों में घुस आते हैं.
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2019 से 2023 के बीच सूबे में जंगली जानवरों के हमलों में 250 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जबकि 84 लोग घायल हुए हैं. दरअसल, इस दौरान फसलों को नुकसान पहुंचाने की 60 हजार से ज्यादा घटनाएं हुई हैं.
हर साल 50 से ज्यादा लोगों की मौत
छत्तीसगढ़ के वन्यजीव विभाग के सूत्रों के मुताबिक, पिछले 11 साल में इस तरह के जंगली जानवरों के हमलों में करीब 595 लोग मारे गए हैं, जिसमें हर साल औसतन 54 लोग मारे जाते हैं. 2021-22 में यह संख्या 95 है, 2022-23 में मरने वालों की संख्या 77 है और 2023-24 में यह संख्या फिर से 77 है. 2024 में अब तक करीब 10 लोगों की मौत हो चुकी है. तादाद बढ़ने के साथ, इस घातक समस्या के पीछे की असल वजहों पर गहराई से विचार करना अहम है, जिसे कोई भी सरकार हल नहीं कर सकती.
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इस तरह के हादसों के पीछे कई वजहें जिम्मदार हैं. इन मुठभेड़ों के पीछे एक अहम वजह उनके अपने आवासों, जंगलों में भोजन की अत्यधिक कमी है. स्थानीय वनस्पति वन्यजीवों के लिए पोषक तत्वों का मुख्य स्रोत है. हालांकि, दुर्भाग्य से अब इसे ‘लैंटाना कैमरा (Lantana Camera)’ नाम के एक आक्रामक पौधे की प्रजाति ने बदल दिया है. छत्तीसगढ़ के जंगल ऐसे खाद्य स्रोतों की भारी कमी का सामना कर रहे हैं, जिससे वन्यजीव भोजन के लिए मानव बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इन संघर्षों में योगदान मिल रहा है.

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