
'छत्तीसगढ़ की हार का जिम्मेदार मैं खुद...' टीएस सिंहदेव ने ली जिम्मेदारी, बोले- आगे भी चुनाव लड़ूंगा
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छत्तीसगढ़ में चुनाव हारने के मामले को लेकर पार्टी के सीनियर नेता टीएस सिंहदेव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पार्टी की हार का जिम्मेदार मैं खुद को मानता हूं. उन्होंने कहा कि अभी मैं रिटायर नहीं हो रहा हूं. मैं आगे भी चुनाव लड़ूंगा और पार्टी के लिए लोगों के बीच जाकर काम करूंगा. वहीं कुमारी शैलजा ने कहा कि हार के बाद हम निराश जरूर हुए हैं, लेकिन हताश नहीं हुए. हम हार के कारणों की समीक्षा कर रहे हैं. आने वाले चुनावों में हम लोगों के बीच जाकर मजबूती से काम करेंगे.
कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में पार्टी की हार का जिम्मेदार मैं खुद को मानता हूं. उन्होंने कहा कि मैं आगे भी चुनाव लड़ूंगा. अभी रिटायर नहीं होने वाला, हमें अभी पार्टी के लिए काम करना है. टीएस सिंह देव से जब पूछा गया कि हार की जिम्मेदारी का पूरा भार अपने ऊपर क्यों ले रहे हैं. इस पर उन्होंने कहा कि सबको लेना चाहिए.आखिर हम काम करते हैं, एक पार्टी का स्ट्रक्चर हैं. पार्टी हमें जवाबदेही देती है. इसलिए जितनी भी जवाबदेही है, उसको लेकर जवाबदार होना चाहिए.
टीएस सिंह देव ने कहा कि जवाबदारी से कभी भी पीछे नहीं हटना चाहिए. आगे बढ़ना है तो सबसे पहले जवाबदारी लेनी होगी.कमजोरी आई है, तो इसका पूरा विश्लेषण करके आगे बढ़ेंगे. मैं मैदान नहीं छोड़ूंगा. पार्टी के लिए लोगों के बीच रहूंगा. 90 हजार लोगों ने अगर मुझे वोट दिया है तो मैं उन 90 हजार लोगों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हो गया. जिन 90 हजार लोगों ने वोट नहीं दिया उनसे मुझे मिलकर संपर्क करना है कि मुझमें क्या कमी रह गई. उनके प्रति भी मुझे जवाबदार होना है.
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कुमारी शैलजा ने कहा- हम निराश हुए हैं, मगर हताश नहीं
वहीं छत्तीसगढ़ में पार्टी की हार को लेकर कुमारी शैलजा ने कहा कि पार्टी की मीटिंग में सीनियर नेताओं ने अपनी अपनी बातें रखीं. हार के कारणों की समीक्षा की गई. ये बात जरूर है कि हम चुनाव हारे, लेकिन कोई सर्वे या कोई भी एजेंसी हो, सबने कहा था कि हम छत्तीसगढ़ में चुनाव जीतने जा रहे हैं. किसी हद तक ये सही साबित भी हुआ है, क्योंकि हमारा वोटिंग प्रतिशत बरकरार है, वो कम नहीं हुआ है.
कुमारी शैलजा ने कहा कि हमें विश्वास था कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने जो काम किया है, जो योजनाएं लेकर आए थे, उससे लोगों का भरोसा जीता. चुनाव हम हारे, सरकार हम नहीं बना पाए. हम निराश तो हुए हैं, लेकिन हताश नहीं हुए हैं. हम हार के कारणों की समीक्षा कर रहे हैं. लोगों का विश्वास हमने खोया नहीं है. लोग अभी भी हम पर नजर रखे हैं.

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