
'चीन की जगह...', चीनी विदेश मंत्री से जयशंकर की मुलाकात पर क्या बोला ग्लोबल टाइम्स?
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विदेश मंत्री एस जयशंकर हाल ही में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मिले हैं. दोनों मंत्रियों ने बातचीत के दौरान सीमा विवाद को जल्द से जल्द सुलझाने पर जोर दिया. अब इस मुलाकात पर चीन के सरकारी अखबार ने टिप्पणी की है.
पिछले कई सालों से चल रहे तनाव के बीच भारत और चीन के विदेश मंत्रियों ने हाल ही में मुलाकात की है. विदेश मंत्री एस जयशंकर 25 जुलाई को लाओस में ASEAN विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मिले. इस मुलाकात के दौरान दोनों ही नेता सीमा विवाद को जल्द से जल्द सुलझाने पर सहमत हुए. दोनों मंत्रियों की मुलाकात पर चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि यह बदलाव दिखाता है कि दोनों पक्ष आपसी विश्वास को और बेहतर बनाने की जरूरत समझ चुके हैं.
ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें लिखा है कि दोनों देशों के बीच रिश्तों में बदलाव वैश्विक भू-राजनीति के लिए जरूरी है. लेख में कहा गया, 'भारत-चीन का रिश्ता सहयोग और प्रतिस्पर्धा का जटिल मिश्रण है. दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग से होने वाले लाभ को पहचाना है और हाल के सालों में व्यापार और निवेश को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण प्रगति की है. चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक सहयोगी है और हाल के सालों में चीन का भारत को निर्यात बहुत तेजी से बढ़ा है.'
चीनी अखबार ने लिखा कि दोनों देश आर्थिक रूप से एक-दूसरे पर निर्भर हैं, बावजूद इसके दोनों देशों के रिश्तों में कड़ी प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक होड़ मची हुई है. भारत और चीन के बीच सहयोग को और मजबूत करने में सबसे बड़ी रुकावट विश्वास की कमी है जो पिछले कुछ सालों में विकसित हुई है.
'भारत चीन को रिप्लेस करने की सोच रहा लेकिन...'
ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का लंबा इतिहास रहा है जिसका द्विपक्षीय रिश्तों पर असर हुआ है. इसके अलावा, हिंद महासागर और भारत के पड़ोसी देशों में चीन का बढ़ता प्रभाव भारत के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. भारत एक चुनौतीपूर्ण स्थिति में है.
ग्लोबल टाइम्स ने आगे लिखा, 'भारत चीन के आर्थिक विकास और निवेश से लाभ उठाना चाहता है और वो चीन से कच्चा माल, मशीनरी, उपकरण आदि की खरीद भी बढ़ाना चाहता है फिर भी भारत अपने नेशनल सेंटिमेंट्स, चीन के रणनीतिक उद्देश्यों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव को लेकर गलतफहमियों के कारण चीनी निवेश पर अधिक प्रतिबंध लगा रहा है. इसी बीच भारत मैन्यूफैक्चरिंग के क्षेत्र में चीन को रिप्लेस करने की भी सोच रहा है. हालांकि, यह आने वाले समय में होने वाला नहीं है.'

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