
'चाइनीज माल' क्यों साबित हुआ ट्रंप का कराया सीजफायर? फिर जंग के मैदान में इजरायल-हमास, 5 Points
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इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमास पर सीज़फ़ायर तोड़ने का आरोप लगाते हुए गाज़ा में 'ज़ोरदार' हमलों का आदेश दिया, जिससे अमेरिका-कतर की मध्यस्थता से हुई ताज़ा शांति दरक गई.
इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फिलिस्तीनी नागरिकों पर फिर से स्ट्राइक करने के आदेश दे दिए. हाल ही में हमास और इजरायल के बीच सीजफायर हुआ था, जिसके बाद गाजा में हमले रुक गए थे. नेतन्याहू ने हमास पर सीज़फ़ायर तोड़ने का आरोप लगाने के बाद गाजा पट्टी पर 'ज़ोरदार' हमले करने का आदेश दिया. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को कहा कि उन्होंने सेना को गाजा में 'ज़ोरदार हमले' करने का आदेश दिया है. इस कदम से अमेरिका की मदद से हुआ सीज़फायर टूट गया.
इजरायली अधिकारियों ने कहा कि हमास द्वारा युद्ध में पहले मारे गए एक बंधक के शव लौटाने के बाद दक्षिणी गाजा में उनके सैनिकों पर गोलियां चलाई गईं. नेतन्याहू ने इस कदम की निंदा करते हुए इसे सीज़फायर समझौते का 'खुला उल्लंघन' बताया. इस समझौते के तहत हमास को सभी इजरायली शवों को तुरंत वापस करना था.
न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली सेना के अधिकारी ने हमास पर तय तैनाती लाइन के पूर्व में सेना पर हमले करके सीज़फायर का उल्लंघन करने का भी आरोप लगाया. मिडिल ईस्ट में हुए इस ताजा टकराव के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अमेरिका और कतर की मध्यस्थता से हुआ गाजा सीजफायर कामयाब क्यों नहीं हो सका? क्या ट्रंप का पीस प्लान 'चाइनीज माल' साबित हो गया? क्योंकि समझौता ज्यादा दिन तक टिक नहीं सका.
1- प्रैक्टिकल नहीं था समझौता
पिछले दिनों हमास और इजरायल के बीच समझौता हुआ था. इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीस प्लान पेश किया था, जिस पर दोनों पक्ष ने साइन भी किया था. समझौते में तय किया गया था कि सभी बंधकों को बहुत जल्द रिहा कर दिया जाएगा, और इज़रायल अपनी सेना को एक तय लाइन तक पीछे हटा लेगा, जो एक मज़बूत, टिकाऊ और हमेशा रहने वाली शांति की दिशा में पहला कदम होगा. समझौते के दौरान ट्रंप ने यह भी कहा था कि हमास को हथियार डालना होगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि यह मिलिटेंट ग्रुप हथियार छोड़ दे, नहीं तो उसे जल्द ही और शायद हिंसक नतीजों का सामना करना पड़ेगा. सीजफायर का एनालिसिस किया जाए तो पता चलेगा कि इजरायल और हमास के बीच हुआ समझौता प्रैक्टिकल नहीं था क्योंकि हमास हथियार छोड़ने के तैयार नहीं है.

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