
गोली से छिदे कान, खून से लथपथ चेहरा और मुट्ठी भींचे ट्रंप की ये तस्वीर क्या US चुनाव का रुख बदल देगी?
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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही इस हमले में सुरक्षित बच गए लेकिन एफबीआई ने इस हमले को कत्ल की कोशिश के रूप में ही घोषित किया है. इस हमले के बाद एक तरफ जहां सीक्रेट सर्विस की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं तो वहीं अमेरिकी गन कंट्रोल की फिर से मांग तेज हो रही है.
अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव में अब लगभग 100 दिन ही शेष हैं. इस बीच डोनाल्ड ट्रंप पर हुए जानलेवा हमले ने पूरे चुनाव कैंपेन को नया मुद्दा और नई दिशा दे दी है. ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी ने बाइडेन प्रशासन पर सुरक्षा के मोर्चे पर फेल होने का आरोप लगाया है. साथ ही बाइडेन के चुनाव कैंपेन में उकसावे वाली भाषा का आरोप लगाते हुए इसे ट्रंप पर हुए हमले से जोड़ दिया है. आइए जानते हैं कि अमेरिका में राजनीतिक हिंसा का इतिहास क्या रहा है? कौन-कौन से नेता हिंसा का निशाना बने हैं और ट्रंप पर हुए हमले का इस चुनाव पर क्या और किस तरह का असर हो सकता है?
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अचानक धांय-धांय गोलियां चलने लगती हैं! चारों ओर अफरातफरी मच जाती है... यहां वो भयावह नजारा दिखा जिसने न सिर्फ अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया को दहला दिया. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और अगले चुनाव में फिर से मजबूत उम्मीदवार दिख रहे रिपब्लिकन कैंडिडेट डोनाल्ड ट्रंप पर गोलियां चलाई गईं. गोली ट्रंप के दाहिने कान में लगी और कान के ऊपरी हिस्से को छेदते हुए पार हो गई. तुरंत सीक्रेट सर्विस के एजेंट्स ने ट्रंप को घेरकर अपनी निगरानी में ले लिया. पूरी दुनिया ने खून से लथपथ ट्रंप के चेहरे की तस्वीर देखी. फायरिंग के ठीक बाद जब ट्रंप को घेरकर सीक्रेट सर्विस के एजेंट ले जा रहे थे तब खून से लथपथ चेहरे के साथ ट्रंप ने अपना कसा हुआ मुक्का ऊपर उठाकर जनता के बीच लहराया और चुनाव में और मजबूती से लड़ने का अपने समर्थकों को संदेश दिया.
ट्रंप भले ही इस हमले में सुरक्षित बच गए लेकिन एफबीआई ने इस हमले को कत्ल की कोशिश के रूप में ही घोषित किया है. इस हमले के बाद एक तरफ जहां सीक्रेट सर्विस की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं तो वहीं अमेरिकी गन कंट्रोल की फिर से मांग तेज हो रही है. हो भी क्यों न. अमेरिका में सियासी हिंसा का लंबा इतिहास रहा है. अब तक 4 अमेरिकी राष्ट्रपतियों की हत्या हो चुकी है तो दो दर्जन से अधिक बड़े नेताओं पर जानलेवा हमले हो चुके हैं.
अब सवाल उठ रहा है कि क्या इस हमले से नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव का रुख बदल जाएगा? क्या बाइडेन के मुकाबले ट्रंप के समर्थन में तेजी से बढ़ोत्तरी होगी? क्या अमेरिका में ट्रंप के पक्ष में नई लहर चल पड़ेगी. वैसे भी अब तक के चुनाव प्रचार में ट्रंप अपने प्रतिद्वंदी बाइडेन से आगे ही दिख रहे थे. आखिर इस हमले की तस्वीरों से अमेरिकी जनमानस और वोटर्स के मन पर क्या असर हो सकता है?
क्या हुआ था रैली में?

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