
गुलाम नबी आजाद ने जयराम रमेश पर ठोका मानहानि का केस, 2 करोड़ का मांगा मुआवजा
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गुलाम नबी आजाद पर तंज कसना कांग्रेस नेता जयराम रमेश को भारी पड़ गया है. उन्होंने जयराम रमेश के खिलाफ मानहानि का दावा किया है. उन्होंने नोटिस मिलने के दो हफ्ते के भीतर माफी मांगने के लिए कहा है. आजाद की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए 2 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा गया है.
डीपीएपी अध्यक्ष गुलाम नबी आजाद ने शुक्रवार को कांग्रेस महासचिव प्रभारी संचार जयराम रमेश को 'गुलाम', 'मीर जाफर' और 'वोट काटने वाला' कहने पर मानहानि का नोटिस भेजा है. आजाद ने नोटिस में कहा कि जयराम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया पोस्ट में कथित रूप से उनके के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया. आजाद के कानूनी सलाहकार नरेश कुमार गुप्ता के जरिए भेजे गए नोटिस में आजाद की "बेदाग प्रतिष्ठा" को नुकसान पहुंचाने के लिए 2 करोड़ रुपये का मुआवजा मांगा गया है.
साथ ही गुलाम नबी आजाद ने जयराम को कानूनी नोटिस मिलने से दो हफ्ते के भीतर प्रिंट-इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए या किसी भी तरह के संचार माध्यम से बिना शर्त माफी मांगने की सलाह दी है.
नोटिस में कहा गया,'आप मिस्टर जयराम रमेश राष्ट्रीय स्तर पर आजाद को दिए गए सम्मान को कलंकित करने और नुकसान पहुंचाने के लिए हमेशा मौके की तलाश में रहते हैं... अपने ट्विटर अकाउंट शब्द में बार-बार पोस्ट के माध्यम से आजाद को पदम भूषण पुरस्कार से सम्मानित किए जाने के तुरंत बाद दूसरों की राय में उन्हें नीचा दिखाने के लिए 'गुलाम' का इस्तेमाल किया गया.
जयराम रमेश ने "गुलाम" नाम का इस्तेमाल "गुलाम" के रूप में किया है. उन्होंने कहा कि रमेश ने अपने बयानों के माध्यम से आईपीसी की धारा 500 के तहत अपराध किया है और मौद्रिक मुआवजे का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है.
मीर जाफर ने बंगाल के नवाब सिराज-उद-दौला के अधीन बंगाल सेना के कमांडर के रूप में काम किया. उसने भारत में ब्रिटिश शासन का मार्ग प्रशस्त करते हुए प्लासी की लड़ाई के दौरान उनके साथ विश्वासघात किया था तब से उनका नाम देशद्रोही का पर्याय बन गया.
नोटिस में कहा कि आजाद के खिलाफ प्रेस बयानों में दिए गए बयान विशुद्ध रूप से द्वेष पर आधारित थे और इससे आजाद को मानसिक पीड़ा, यातना, उत्पीड़न हुआ और उनकी छवि खराब हुई, जिसकी सुधारा नहीं जा सकता.

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