
गुरु, शिष्या और समाधि का रहस्य... 10 साल से उलझी है आशुतोष महाराज की पहेली, अब क्या होगा साध्वी का?
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कहां तो बात थी कि साध्वी आशुतोषांबरी 30 दिनों तक समाधि में रहेंगी और महीने भर का वक़्त पूरा होते-होते ना सिर्फ खुद समाधि के वापस चली आएंगी, बल्कि अपने साथ-साथ पिछले दस सालों से डीप फ्रिजर में लेटे बाबा आशुतोष महाराज को भी समाधि से वापस ले आएंगी. लेकिन यहां तो मामला ही उल्टा पड़ गया.
Sadhvi Ashutoshambari Samadhi: किसी की मौत हो गई है या फिर वो समाधि में लीन है, ये कैसे पता चलेगा? जाहिर इस बारे में डॉक्टर बताएगा. लेकिन अब एक ऐसी मौत या यूं कहें कि समाधि का मामला सामने आया है, जो डॉक्टर के पास जाने से पहले ही कोर्ट पहुंच गया. अब अदालत से एक लाश को सहेजकर रखने की इजाजत मांगी जा रही है. क्योंकि वो लाश कभी भी जिंदा हो सकती है. मामला आशुतोष महाराज की उस शिष्या का है, जो महाराज को समाधि से वापस लाने के लिए 38 दिन पहले खुद समाधि में गई थी. लेकिन आगे जो हुआ उसने पूरा मामला ही पलट कर रख दिया.
नहीं लौट कर आईं साध्वी कहां तो बात थी कि साध्वी आशुतोषांबरी 30 दिनों तक समाधि में रहेंगी और महीने भर का वक़्त पूरा होते-होते ना सिर्फ खुद समाधि के वापस चली आएंगी, बल्कि अपने साथ-साथ पिछले दस सालों से डीप फ्रिजर में लेटे बाबा आशुतोष महाराज को भी समाधि से वापस ले आएंगी. लेकिन यहां तो मामला ही उल्टा पड़ गया. आशुतोष महाराज को समाधि से वापस लाना तो दूर की बात, यहां खुद साध्वी आशुतोषांबरी का ही समाधि से वापस लौटना मुश्किल लग रहा है.
शिष्यों ने कोर्ट से लगाई ये गुहार लखनऊ के आनंद आश्रम में साध्वी आशुतोषांबरी की समाधि को अब 39 दिनों का वक़्त गुजर चुका है, लेकिन दूर-दूर तक उनके समाधि से वापस आने की उम्मीद नज़र नहीं आ रही. और शायद यही वजह है कि खुद आश्रम के कर्ता-धर्ताओं ने इसे लेकर अदालत में अर्ज़ी दी है और आशुतोष महाराज की तरह ही साध्वी आशुतोषांबरी का शरीर पर लंबे वक़्त तक आश्रम में ही रखने की इजाज़त मांगी है. हालांकि अदालत ने इस अर्जी पर कोई आखिरी फैसला नहीं लिया है, लेकिन आश्रम फिलहाल इसे इजाजत ही मान कर चल रहा है.
साध्वी के शरीर को बाहर रखना चाहते हैं शिष्य फिलहाल कहानी में सबसे बड़ा मोड़ यही है कि अब आश्रम के लोग साध्वी आशुतोषांबरी के शरीर को पूरे एक साल तक यूं ही जस का तस आश्रम में रखने की तैयारी में हैं. लेकिन आशुतोष महाराज और साध्वी आशुतोषांबरी में फर्क बस इतना ही है कि आशुतोष महाराज के शिष्यों की तरह आशुतोषांबरी के अनुयायी उनके शरीर को डीप फ्रिजर में नहीं रखना चाहते. बल्कि उनकी तो इच्छा है कि जड़ी बूटियों के लेप के साथ उनके शरीर को यूं ही फ्रिजर से बाहर खुली हवा में रखा जाए. बल्कि साध्वी आशुतोषांबरी के शिष्यों का तो यहां तक कहना है कि चूंकि आशुतोष महाराज के अनुयायियों ने उनके शरीर को डीप फ्रिज़र में रख दिया है, इसीलिए उनका भी समाधि में वापस लौटना मुश्किल हो रहा है.
कैसे होगा इस कहानी का अंत? तो क्या वाक़ई एक साल तक साध्वी आशुतोषांबरी का शरीर आश्रम में यूं ही रखा रहेगा? तो क्या सिर्फ़ जड़ी बूटियों के लेप के सहारे किसी के शरीर को इस तरह प्रिजर्व किया जा सकता है? अगर वाकई साध्वी के शरीर को डीप फ्रिज़र में नहीं रखा गया तो क्या उसके ख़राब होने का ख़तरा नहीं है? साध्वी की इस समाधि को लेकर आख़िर उनकी जांच करने वाले डॉक्टरों का क्या कहना है? अगर एक साल में भी साध्वी समाधि से वापस नहीं लौटी तो आख़िर इस कहानी का अंत कैसे होने वाला है? आखि़र समाधि के नाम पर किसी के शरीर को यूं ही रख लेने पर क़ानून क्या कहता है? ज़ाहिर है ये वो सवाल हैं, जिसका जवाब हर कोई जानना चाहता है. लेकिन इन सवालों के तह तक जाने के लिए दो-दो समाधियों की इस महागाथा को अच्छी तरह समझना ज़रूरी है.
28 जनवरी 2014 जालंधर, पंजाब यही वो तारीख थी, जब जालंधर के नूरमहल में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के मुखिया आशुतोष महाराज ने जीते जी समाधि ले ली. समाधि में जाते हुए वो ऐसे लेटे कि फिर कभी नहीं उठे. एक वो दिन था और एक आज का दिन, महाराज के शिष्य आज भी उनके अपने शरीर में वापस लौट आने की उम्मीद लिए उनका इंतज़ार कर रहे हैं. और तो और आशुतोष महाराज के शिष्यों ने उनके शरीर को पिछले दस सालों से उनके दोबारा उठ खड़े होने की उम्मीद में एक डीप फ्रिजर में रख छोड़ा है.

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