
खूनी संघर्ष का जिम्मेदार कौन? कैसे होगी सुलह... हिंसा पर क्या बोलीं मणिपुर की 'आयरन लेडी' Irom Chanu Sharmila
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81 दिन बीत चुके हैं. लेकिन मणिपुर में हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. हथियारबंद हमलावरों के गुट लोगों पर फायरिंग कर रहे हैं. मासूम और बेबस लोगों के घरों को फूंका जा रहा है. हिंसा की इन घटनाओं के बीच आजतक ने मणिपुर की 'आयरन लेडी' इरोम शर्मिला (Irom Chanu Sharmila) से बात की है.
भारत के पूर्वात्तर में स्थित मणिपुर राज्य हिंसा की आग में झुलस रहा है. पश्चिम में असम, दक्षिण में मिजोरम और उत्तर में नगालैंड से घिरा मिजोरम भारत के लिए बेहद अहम है, क्योंकि पूर्व में इसकी सीमा म्यांमार से मिलती है. मणिपुर में हिंसा की शुरुआत 3 मई यानी आज से ठीक 81 दिन पहले हुई. तब से लेकर अब तक भारत का बॉर्डर स्टेट (मणिपुर) तनाव का शिकार हो रहा है. अब तक 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है तो वहीं कुछ ऐसी घटनाएं भी सामने आई हैं, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है.
हिंसा की इन घटनाओं के बीच आजतक ने मणिपुर की 'आयरन लेडी' के नाम से मशहूर इरोम शर्मिला से बात की. इरोम वही हैं, जिन्होंने अफस्पा (Armed Forces Special Powers Act, 1958) के खिलाफ 16 साल तक अनशन किया. मणिपुर में हिंसा को लेकर उनसे 6 अहम सवाल किए गए, जिनका जवाब देते हुए उन्होंने हिंसा के पीछे की वजह से लेकर यह भी बताया कि इसे कंट्रोल करने के लिए क्या किया जा सकता है. बता दें कि इरोम ब्रिटिश नागरिक डेसमंड कौटिन्हो (Desmond Coutinho) से शादी कर चुकी हैं. उनके दो बच्चे हैं और वह बेंगलुरु में रहती हैं.
1. मणिपुर की त्रासदी को किस तरह देखती हैं?
मैं खुद को अपराधी मानती हूं. मणिपुर हिंसा की जड़ें बेरोजगारी, नशाखोरी और बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ी हुई है. राज्य सरकार तो कर्मचारियों को हर महीने नियमित तनख्वाह तक नहीं दे पा रही है. इतना ही नहीं राज्य में आतंकी कर्मचारियों से एक उनकी सैलरी का एक हिस्सा भी लेते हैं. मणिपुर के लोगों का मन आशांत हैं.
2. 78 दिन बीत चुके हैं. इस अशांति का क्या समाधान हो सकता है?
हिंसा की आग में झुलस रहे दोनों पक्ष नफरत से भरे हुए हैं. दोनों एक दूसरे पर आरोप लगाते हुए शांतिवार्ता के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं. उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मणिपुर के विधायकों से मुलाकात कर समस्या का समाधान करेंगे. पीएम से निवेदन है कि वे तत्काल मामले पर हस्तक्षेप करें. पड़ोसी राज्यों को इस मामले में दखलअंदाजी तो नहीं करना चाहिए. लेकिन वह स्थिति सामान्य करने के लिए कोशिश कर सकते हैं.

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