
क्रांतिकारी कंटेंट का रिस्क या दर्शक बटोरने की जुगत! क्यों बदल गया है नेटफ्लिक्स के इंडिया ऑरिजिनल्स का तेवर?
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नेटफ्लिक्स इंडिया की 2026 स्लेट स्टार कास्ट से भरी जरूर है, लेकिन कंटेंट का टोन पहले से बदला हुआ नजर आता है. ‘सेक्रेड गेम्स’ वाले क्रांतिकारी दौर से निकलकर नेटफ्लिक्स अब ज्यादा सेफ और फैमिली-फ्रेंडली कहानियों पर फोकस करता दिख रहा है. इससे नेटफ्लिक्स की आइडेंटिटी पूरी तरह बदली हुई नजर आने लगी है.
नेटफ्लिक्स इंडिया ने मंगलवार को अपना 2026 का पिटारा खोल दिया है. और इस पिटारे से निकले हैं 21 नई शोज और फिल्में. सनी देओल की ओटीटी डेब्यू फिल्म ‘इक्का’ से लेकर, अनिल कपूर और विजय वर्मा के शो ‘फैमिली बिजनेस’ तक नेटफ्लिक्स ने फैन्स को खुश करने वाले कंटेंट का अच्छा-खासा लाइन-अप दिया है. लेकिन 2026 की इस स्लेट को गौर से देखने पर आपको नजर आएगा कि नेटफ्लिक्स का तेवर और फ्लेवर कुछ बदला हुआ सा है. नए नेटफ्लिक्स ऑरिजिनल्स में कुछ गायब सा है. ये शोज और फिल्में जैसे नेटफ्लिक्स के लगते ही नहीं.
‘क्रांतिकारी’ नेटफ्लिक्स का दौर नेटफ्लिक्स के इंडियन कंटेंट की कहानी 2018 में शुरू हुई थी और पहला पन्ना था— सेक्रेड गेम्स. सैफ अली खान और नवाजुद्दीन के लीड रोल वाला ये शो आज भी अपने कंटेंट के लिए याद किया जाता है. एक डार्क सस्पेंस थ्रिलर, जिसमें गैंगस्टर ड्रामा और पुलिस इन्वेस्टिगेशन का एक बराबर हिस्सा था. समाज, पॉलिटिक्स और धर्म पर बिना किसी संकोच कमेंट्री और बोल्ड सीन्स से लोगों को इस शो ने ऑलमोस्ट शॉक कर दिया था. मगर जनता का अटेंशन इस शो ने ऐसा बांधा था कि आज भी ओटीटी के कंटेंट क्रिएटर्स का एम्बिशन ‘सेक्रेड गेम्स’ जैसा रिस्पॉन्स पाना है.
नेटफ्लिक्स इंडिया का ये क्रांतिकारी अंदाज सिर्फ ‘सेक्रेड गेम्स’ तक ही नहीं रुका. ‘गूल’ (2018), ‘डेल्ही क्राइम’ (2019), ‘लीला’ (2019) और ‘जामताड़ा’ (2020) जैसे शोज कंटेंट की दुनिया में एक बगावत वाले तेवर के साथ आए थे. रोमांटिक ड्रामा शो ‘ताजमहल 1989’ भी ऐसी थीम्स और कहानी लेकर आया कि इसे आज भी आइकॉनिक माना जाता है. तब नेटफ्लिक्स ऑरिजिनल्स कुछ ऐसा लेकर आ रहे थे जो इंडियन ऑडियंस ने इंडियन कंटेंट में पहले नहीं देखा था. सिनेमैटोग्राफी से लेकर कलर ग्रेडिंग, एडिटिंग और एक्टिंग तक ये शो टेक्निकली भी कंटेंट का लेवल बढ़ाने वाले थे.
नेटफ्लिक्स की नई स्लेट में क्या बदला हुआ है? 2026 के लिए नेटफ्लिक्स ने जो ऑरिजिनल्स अनाउंस किए हैं, वो कास्टिंग के लिए तो फैन्स का ध्यान खींच रहे हैं. जैसे— ‘इक्का’ में सनी देओल और अक्षय खन्ना साथ आ रहे हैं. ‘फैमिली बिजनेस’ में अनिल कपूर और विजय वर्मा. ऐसे ही ‘हम हिंदुस्तानी’ में सैफ अली खान और प्रतीक गांधी. मगर इस चमकदार कास्टिंग से हटकर जब शोज के टॉपिक और प्लॉट देखें तो ऐसा लगता है कि इनमें पर्याप्त नेटफ्लिक्स फैक्टर नहीं है.
नेटफ्लिक्स के इंडियन ऑरिजिनल्स को शुरू से फॉलो करने वाले किसी भी दर्शक को यही बात हैरान कर देगी कि इतने सारे फर्स्ट लुक्स में कहीं खून की एक बूंद तक नहीं दिखती. सब कुछ बहुत पॉलिश किया हुआ, धुला-पोंछा सा है. यहां तक कि नई स्लेट के शोज का कलर पैलेट भी ‘सेक्रेड गेम्स’ वाले दौर के नेटफ्लिक्स से बिल्कुल अलग है.
2026 की लिस्ट में ज्यादातर ड्रामा फैमिली, कॉर्पोरेट दफ्तरों और कोर्टरूम में फंसा है. किसी भी कहानी में कोई पॉलिटिकल टोन नहीं दिखता. ना ही किसी शो की थीम इस कदर डार्क है कि सिर्फ टीजर ही दर्शक को अनकम्फर्टेबल कर दे. नेटफ्लिक्स के 2026 ऑरिजिनल्स के फर्स्ट लुक, टीजर या पोस्टर में भी कुछ ऐसा नहीं दिखता जो इंडियन कंटेंट के ढांचे को तोड़ता हुआ लगे. नेटफ्लिक्स उन जॉनर को प्रमोट करता हुआ लग रहा है जो शॉक नहीं करते, ऑफेंड नहीं करते— यानी सेफ कंटेंट.

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