
क्यों खौफ में हैं दुनिया दहलाने वाले दहशतगर्द? ISI का प्लान जिससे दाऊद-हाफिज पर भी मंडरा रही मौत
AajTak
पाकिस्तान की पनाह में सालों से सिर छिपाए बैठे आतंकी अब डरने लगे हैं. कभी जिन्हें लगता था कि उन्होंने दुनिया पर दहशत के बल पर राज किया है, आलम यह है कि उनकी खुद की जान के लाले पड़े हुए हैं और मौत का खौफ ऐसा मंडरा रहा है कि वह घरों से निकल ही नहीं रहे, अंदर ही दुबके हुए हैं. सामने आया है कि ISI खुद ही इन आतंकियों की जान का दुश्मन बन गया है.
भारत के खिलाफ पाकिस्तान की धरती से साजिश रचने वाले आतंकी इस समय काफी आशंकित हैं. उन्हें डर है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी कहीं दूसरे आतंकियों की तरह दाऊद और हाफिज सईद को यूज एंड थ्रो पॉलिसी के तहत षड्यंत्र रचकर मरवा न दे. यही वजह है कि डर के मारे दाऊद इब्राहिम और हाफिज सईद अपने घरों में दुबके हुए हैं और वो किसी भी तरीके से बाहर नहीं निकल रहे हैं. खुफिया एजेंसियों के सूत्रों ने आज तक को बताया है कि पाकिस्तान में बैठकर भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले आतंकियों में खौफ है उनको लगता है कि वह घर से बाहर निकलेंगे तो मारे जाएंगे. दाऊद इब्राहिम, हाफिज सईद और सैयद सलाउद्दीन इस समय अपने घरों से नहीं निकल रहे हैं.
यही नहीं खुफिया सूत्रों ने बताया है कि पाकिस्तान में छुपे आतंकी जो अब उसके किसी काम के नहीं रह गए हैं, उन्हे यूज़ एंड थ्रो पालिसी के तहत मार दिया जा रहा है. 3 महीने में ऐसे चार आतंकियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत या हत्या हो चुकी है. इन हत्या-मौतों की फेहरिस्त में 26/11 का मास्टरमाइंड, हिजबुल आतंकी और खालिस्तानी आतंकी शामिल हैं.
यूज़ एन्ड थ्रो पॉलिसी के तहत ISI की क्या है चाल? ताजा मामला आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी हाफिज अब्दुल सलाम भुट्टावी की पाकिस्तान की एक जेल में संदिग्ध मौत का है. टेरर फंडिंग मामले में वह जेल में बंद था. वह प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा प्रमुख और मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का करीबी था. 29 मई को हाफिज की छाती में तेज दर्द हुआ और उसे पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया.
इन आतंकियों-दहशतगर्दों की भी हुई हत्याएं इससे पहले इस साल 6 मई को खालिस्तान कमांडो फोर्स के मोस्ट वांटेड अपराधी परमजीत सिंह पंजवर की लाहौर में हत्या हो गई. परमजीत सिंह जब सुबह मार्निग वॉक पर था तो मोटरसाइकिल से दो हमलावर आये और उन्होंने उसे गोली मार दी. परमजीत सिंह पर पंजाब से इलाकों में ड्रग्स की सप्लाई का आरोप था. इस साल 20 फरवरी को रावलपिंडी में हिजबुल मुजाहिद्दीन के टाप कमांडर बशीर अहमद पीर उर्फ इमतियाज आलम को प्वाइंट ब्लैक से एक दुकान के सामने गोली मार दी गई.
पीर पर भारत में आतंकी गतिविधियों और भारत के खिलाफ देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के मामले थे. पाक अधिकृत कश्मीर से वो भारत के खिलाफ आतंकी साजिशों में शामिल था. आतंकी गुट अलबदर से संबंध रखने के आरोपी सय्यद खालिद रजा को इस साल फरवरी में कराची में उसके घर के बाहर गोली मारी गई. खालिद रजा जब अपने घर से बाहर पार्किंग की तरफ जा रहा था तो मोटर साइकिल सवार युवकों ने उस पर फायरिंग की जिसमें उसकी मौत हो गई. अल बदर जम्मू कश्मीर में कई आतंकी गतिविधियों में शामिल है.
हाफिज सईद के घर हुआ था हमला जम्मू कश्मीर में आतंकी संगठनों में युवकों की भर्ती करने के लिए जाना जाने वाला आतंकी कमांडर सैयद नूर शालोबार की पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में गोली मारकर दिनदहाड़े हत्या कर दी गई. सैयद नूर पाकिस्तानी सेना और आईएसआई के लिए काम करता था. साल 2021 में लश्कर ए तय्यबा चीफ हाफिज सईद के लाहौर में स्थित जोहर टाउन पर हमला हुआ जिसमें वो बच गया. उसके घर की पार्किग में एक विस्फोटों से भरी कार में धमाका हुआ लेकिन घर पर न होने से हाफिज सईद बच गया.

ईरान की धमकियों के जवाब में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपने कई सहयोगियों के साथ सबसे बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है. यह युद्धाभ्यास US एयर फोर्सेज सेंट्रल (AFCENT) द्वारा आयोजित किया गया है, जो कई दिनों तक चलेगा. इस युद्धाभ्यास की घोषणा 27 जनवरी को हुई थी और यह अभी भी जारी है. माना जा रहा है कि यह अभ्यास अगले दो से तीन दिनों तक चलेगा. इस प्रयास का मकसद क्षेत्र में तनाव के बीच सैन्य तैयारियों को बढ़ाना और सहयोगियों के साथ सामरिक तालमेल को मजबूत करना है.

कोलंबिया और वेनेज़ुएला की सीमा के पास एक जेट विमान अचानक लापता हो गया. यह विमान फ्लाइट नंबर NSE 8849 थी जो कुकुटा से ओकाना की ओर जा रही थी. इस विमान ने सुबह 11 बजकर 42 मिनट पर उड़ान भरी थी लेकिन लैंडिंग से पहले ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया. राडार से इस विमान का अचानक गायब होना चिंता का विषय है.

वेनेजुएला में मिली बड़ी कामयाबी के बाद अब डॉनल्ड ट्रंप का आत्मविश्वास आसमान छू रहा है। कूटनीति के गलियारों में चर्चा है कि ट्रंप के मुंह 'खून लग गया है' और अब उनकी नज़रें क्यूबा और ईरान पर टिक गई हैं... और अब वो कह रहे हैं- ये दिल मांगे मोर...। ट्रंप की रणनीति अब सिर्फ दबाव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सीधे सत्ता परिवर्तन के खेल में उतर चुके हैं। क्या क्यूबा और ईरान ट्रंप की इस 'मोमेंटम' वाली कूटनीति का मुकाबला कर पाएंगे?










