क्या सरकारी नौकरी की चाहत ही पेपर माफिया को मजबूत करती है?
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आखिर राज्यों के भर्ती आयोग, हमारे देश के चुनाव आयोग की तरह काम क्यों नहीं कर पाते हैं? जो करोड़ों लोगों को बिना किसी चूक और लीक के वोट करा लेता है फिर परीक्षा क्यों नहीं हो पाती? क्या करोड़ों बेरोजगारों की एक सरकारी नौकरी की चाहत ही पेपर माफिया को मजबूत करती है? ऐसे तमाम सवालों का जवाब अब रिपोर्ट में देखते हैं.
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वेस्ट एशिया में छिड़ी जंग के बाद पैदा हुए हालातों पर प्रधानमंत्री लोकसभा को संबोधित कर रहे हैं. इस बीच उन्होंने कहा कि अब इस संकट को 3 सप्ताह से ज्यादा हो रहा है. इसका पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर, लोगों के जीवन पर बहुत ही विपरित असर हो रहा है. इसलिए पूरी दुनिया इस संकट के जल्द से जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से आग्रह भी कर रही है.












