
क्या चीन से घिरता जा रहा है भारत? पाकिस्तान, नेपाल और अब बांग्लादेश... पड़ोसी मुल्कों ने कैसे बढ़ाई चिंता
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दक्षिण एशियाई देशों में राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता बढ़ती जा रही है. भारत के अलावा अब तक बांग्लादेश ऐसा था, जहां राजनीतिक-आर्थिक स्थिरता थी. लेकिन अब बांग्लादेश में भी अस्थिरता आ गई है. ऐसे में भारत के लिए चिंता की सबसे बड़ी बात ये है कि इस अस्थिरता की वजह से उसके पड़ोसी चीन के करीबी बनते जा रहे हैं.
हाल के समय में जियो पॉलिटिक्स में बहुत बदलाव हुआ है. खासकर साउथ एशिया में. और इससे सबसे ज्यादा प्रभावित भारत ही हुआ है. जैसे- बांग्लादेश में हुआ तख्तापलट भी भारत के लिए किसी झटके से कम नहीं है.
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक बार कहा था- 'आप दोस्त बदल सकते हैं, पड़ोसी नहीं.' भारत के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि उसे पड़ोसी बहुत अच्छे नहीं मिले हैं.
भारत के जितने भी पड़ोसी हैं, उनमें से एक भी ऐसा नहीं है जहां राजनीतिक स्थिरता हो. एक बांग्लादेश था, जो राजनीतिक और आर्थिक रूप से स्थिर था, लेकिन पिछले हफ्ते वहां भी तख्तापलट हो गया. प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देना पड़ा और बांग्लादेश भी छोड़कर आना पड़ा. फिलहाल शेख हसीना भारत में हैं.
भूटान को छोड़ दिया जाए तो सारे पड़ोसी मुल्कों में ऐसी सत्ता है, जिनका रुख एंटी-इंडिया माना जाता है. नेपाल में पिछले महीने ही सत्ता बदली है और अब वहां चीन की समर्थक सरकार है. बांग्लादेश में अभी अंतरिम सरकार है और मोहम्मद युनूस इसके मुखिया हैं. लेकिन कुछ ही महीनों में वहां चुनाव होंगे और ऐसी सरकार आने की आशंका है जो भारत विरोधी रुख अपना सकती है.
बांग्लादेश का संकट कितना बड़ा?
बांग्लादेश बना ही भारत की मदद से था और तब से ही दोनों मुल्कों के रिश्ते बेहतरीन थे. लेकिन अब शेख हसीना का सत्ता में न होना भारत के लिए मुश्किल हो सकता है. शेख हसीना भारत के ज्यादा करीब रहीं हैं और उनका सत्ता में रहना भारत के लिए फायदेमंद ही रहा है.

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