
क्या एक नई ईस्ट इंडिया कंपनी का उदय हो रहा है? रुबियो का भाषण ट्रंप के साम्राज्यवादी दबदबे का संकेत है
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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का भाषण बिना किसी लाग लपेट के विस्तारवादी था. उन्होंने इंडस्ट्री को फिर से बनाने, बॉर्डर को कंट्रोल करने और संप्रभुता को वापस पाने के बारे में बात की. इस दौरान उनका टोन शक्ति के मद में डूबे एक कोलोनाइजर जैसा था. विशेषज्ञों ने कहा है कि भारत को इस टोन की निंदा करनी चाहिए.
18वीं और 19वीं सदी के ज़्यादातर समय में यूरोपियन ताकतों ने मार्केट और कच्चे माल की होड़ में एशिया और अफ्रीका को बांट लिया. रेलवे बिछाई गईं और पोर्ट बनाए गए. यहां से निकले संसाधनों का इस्तेमाल स्थानीय उद्योगों के विकास में नहीं किया गया, बल्कि उन्हें यूरोप भेज दिया गया. इनकी बहुत बड़ी इंसानी और आर्थिक कीमत चुकानी पड़ी.
अब सदियों बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पश्चिमी देशों से कब्जे की इस जंग में फिर से उतरने को कहा है. ताकि 'ग्लोबल साउथ की इकॉनमी में मार्केट शेयर' पर कब्जा किया जा सके. कई विशेषज्ञ इसे ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन की कॉलोनाइज़ेशन की कोशिश के तौर पर देखते हैं, इन देशों ने कहा है कि भारत को इस बयान की भर्त्सना करनी चाहिए.
म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए मार्को रुबियो ने इसे "नई पश्चिमी सदी" बनाने का हिस्सा बताया.
म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस विदेश और सिक्योरिटी पॉलिसी पर दुनिया के सबसे असरदार सालाना फोरम में से एक है. इसमें 70 से ज़्यादा देशों के राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री, मिलिट्री चीफ, डिप्लोमैट और पॉलिसी एक्सपर्ट ग्लोबल सिक्योरिटी चुनौतियों पर बहस करने के लिए इकट्ठा होते हैं.
रुबियो का साम्राज्यवादी नजरिया आधुनिक विश्व के लिए एक चौंका देने वाला ऐलान है. ऐसा इसलिए क्योंकि ग्लोबल साउथ के ज़्यादातर हिस्सों में गुलामी के जख्म अभी भी ताज़ा हैं. इसलिए एक बड़ा सवाल सवाल पैदा हो रहा है- क्या ग्लोबल साउथ को आर्थिक दबदबे के एक नए दौर का सामना करना पड़ेगा?
और इस बार हो सकता है कि इसे सीधे यूरोप लीड न करे, बल्कि ये जिम्मेदारी यूनाइटेड स्टेट्स आफ अमेरिका निभाए.

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को कहा कि वैश्विक आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को कम करने में मदद करने के लिए अमेरिका जल्द ही टैंकरों में फंसे ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटा सकता है. बेसेंट ने कहा कि प्रतिबंधित ईरानी तेल के वैश्विक आपूर्ति में शामिल होने से अगले 10 से 14 दिनों तक तेल की कीमतें कम रखने में मदद मिलेगी.

ईरान से अमेरिका-इजरायल की लड़ाई की आंच आज और भड़क गई. अपने सबसे बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स पर इजरायल के हमले के जवाब में ईरान ने बीती रात से खाड़ी देशों में कई अहम तेल और गैस के ठिकानों पर हमला किया है. इन हमलों का असर ये है कि आज भारत के समय से दोपहर 3 बजे तक ब्रेंट क्रूड ऑयल 118 डॉलर प्रति बैरल की सीमा को पार कर गया था. इसका असर शेयर बाजार से लेकर सोने-चांदी की कीमतों पर पड़ा है. जहां शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट आयी वहीं सोने-चांदी की कीमतें भी टूट गईं. भारत के शेयर बाजार से आज 12 लाख करोड़ से अधिक की संपत्ति साफ हो गई है. सवाल ये है कि क्या पश्चिम एशिया में अब युद्ध का रुख पूरी दुनिया को चपेट में ले चुका है ? इस बीच पहली बार 12 मुस्लिम देशों के विदेश मंत्रियों ने खाड़ी देशों पर ईरान के हमले के खिलाफ बयान जारी किया है. तो उधर राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर कड़ा रुख बरकरार रखने के बावजूद ईरानी गैस फील्ड पर इजरायल के हमले से पल्ला झाड़ा है.

अमेरिकी युद्ध मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि आज ईरान पर अमेरिका अटैक का सबसे बड़ा पैकेज लॉन्च करने जा रहा है. जंग की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे उद्देश्य कभी बदले नहीं हैं और ये जंग राष्ट्रपति ट्रंप की इच्छानुसार खत्म होगा. आज ही ईरान ने अपने स्टैंड को बताते हुए कहा था कि अभी उसका बदला पूरा नहीं हुआ है.

ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग अब अपने सबसे निर्णायक और संभवतः सबसे खौफनाक मोड़ पर पहुंच गई है. आज डोवर एयरफोर्स बेस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन छह अमेरिकी नायकों को अंतिम विदाई दी, जिन्होंने एक विमान हादसे में अपनी जान गंवाई लेकिन इस शोक के बीच, वॉशिंगटन के गलियारों से एक ऐसी खबर आ रही है जो पूरी दुनिया को दहला सकती है. रॉयटर्स की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन अब ईरान में 'बूट्स ऑन द ग्राउंड' यानी थल सेना उतारने पर बेहद गंभीरता से विचार कर रहा है.

मैं श्वेता सिंह सीधे युद्ध भूमि से आपको महायुद्ध के बीसवें दिन की खबर बता रही हूं. कल ईरान की गैस फील्ड पर इजरायल के हमले के बाद लगातार चार खाड़ी देश के ऑयल-गैस डिपो-रिफाइनरी पर बड़ा हमला ईरान ने कर दिया है. ईरान ने सऊदी अरामको और यूएई के टर्मिनल के अलावा कतर के सबसे बड़े गैस टू लिक्वड प्लांट रास लफान पर मिसाइल हमला कर दिया. कतर के इस प्लांट से दुनिया को 20 से 25 प्रतिशत गैस की सप्लाई होती है. वहीं सऊदी अरब के यनबू पोर्ट पर स्थित सैमरेफ ऑयल रिफाइनरी पर हवाई हमला हुआ है.

अमेरिकी अधिकारियों के वॉशिंगटन आर्मी बेस के ऊपर कुछ अनजान ड्रोन देखे जाने बाद वहां हड़कंप मच गया है. इसी बेस पर विदेश मंत्री मार्को रूबियो और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ रहते हैं. अभी तक ये पता नहीं लग पाया है कि ये ड्रोन कहां से आए थे. इसके बाद सुरक्षा और बढ़ा दी गई है. इस पर व्हाइट हाउस में एक बैठक भी हुई है, जिसमें इस बात पर चर्चा हुई है कि इन हालातों से कैसे निपटा जाए.







