
क्या अमेरिका में शटडाउन की वजह से भारतीयों के 'ड्रीम अमेरिका' का शटर डाउन हो जाएगा?
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अमेरिका में शटडाउन शुरू हो चुका है. संसद में बजट पर छिड़ी रार की वजह से कई सरकारी योजनाएं रुक जाएंगी और बहुत से लोग लंबी छुट्टी पर भेज दिए जाएंगे, जिनके वेतन की फंडिंग नहीं हो पा रही. लेकिन क्या इसका असर इमिग्रेंट्स पर भी हो सकता है, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार इस मुद्दे पर आक्रामक रहे?
अमेरिकी संसद में सरकार के खर्चों को लेकर सहमति नहीं बन सकी. बहुत से बिल पास नहीं हुए और नतीजा रहा फेडरल शटडाउन. ट्रंप के पहले कार्यकाल में साल 2018 के बाद से ये यूएस का पहला शटडाउन है. इससे बहुत से सरकारी प्रोग्राम अस्थाई तौर पर रुक सकते हैं. लाखों ऐसे कर्मचारी घर बैठ जाएंगे, जिनका काम अनिवार्य नहीं. कुल मिलाकर, बेहद जरूरी सर्विसेज ही चालू रह सकेंगी. अमेरिका में लाखों इमिग्रेंट्स भी हैं, जिन्होंने वहां रहने के लिए अर्जी लगाई हुई है. बजट अटकने का उन पर कितना असर हो सकता है?
कहां अटक गई गाड़ी
सरकार चलाने के लिए बजट पास होना जरूरी है. अगर किसी वजह से रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स इसपर सहमत न हो सकें तो फंडिंग नहीं होती. ऐसे में सरकारी एजेंसियां बिना वेतन के बंद हो जाती हैं. लेकिन सभी सरकारी सेवाओं पर इसका असर नहीं होता, बल्कि नॉन-एसेंशियल पर ही असर होता है. यानी ऐसी सर्विस जिसके बिना कुछ समय के लिए काम बंद हो जाए. यही शटडाउन है. हालांकि अगर ये लंबा खिंचे तो जरूरी सेवाएं भी एक-एक करके रुकने लगती हैं.
फिलहाल दोनों ही दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. ये नहीं पता कि शटडाउन कब खत्म होगा. बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, आठ लाख से अधिक कर्मचारी अस्थायी अवकाश पर भेजे जा सकते हैं.
किन सेवाओं पर नहीं होगा असर
यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज में आवेदन शुल्क से काम होता है. लिहाजा इसके ज्यादातर कर्मचारी काम कर रहे हैं. यही वो विभाग है, जहां ग्रीन कार्ड, वीजा आवेदन जैसी चीजें देखी जाती हैं. यानी इमिग्रेंट्स पर खास असर नहीं होगा. हालांकि, कुछ स्थानों पर सीमित स्टाफ के कारण थोड़ी देरी हो सकती है.

लेकिन अब ये कहानी उल्टी घूमने लगी है और हो ये रहा है कि अमेरिका और चीन जैसे देशों ने अमेरिका से जो US BONDS खरीदे थे, उन्हें इन देशों ने बेचना शुरू कर दिया है और इन्हें बेचकर भारत और चाइना को जो पैसा मिल रहा है, उससे वो सोना खरीद रहे हैं और क्योंकि दुनिया के अलग अलग केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़ी मात्रा में सोना खरीदा जा रहा है इसलिए सोने की कीमतों में जबरदस्त वृद्धि हो रही हैं.

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