
केजरीवाल के केस ने तो बाकी दलों के लिए खतरा पैदा कर दिया है!
AajTak
दिल्ली हाईकोर्ट का ये मान लेना कि आम आदमी पार्टी भी एक कंपनी की ही तरह है, बाकी राजनीतिक दलों के लिए भी बड़ी मुसीबत है. भ्रष्टाचार के मामलों में अब तो जिम्मेदार पदाधिकारी भी जांच के दायरे में आ जाएंगे - और क्षेत्रीय दलों के लिए तो और भी मुसीबत है जहां परिवार ही पार्टी चलाता है.
भले ही दिल्ली शराब नीति केस कारण बना हो. भले ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद का हाई कोर्ट में गिरफ्तारी को चैलेंज करना उलटा पड़ा हो. भले ही आम आदमी पार्टी PMLA की धारा 70 के तहत जांच के दायरे में आने वाली पहली पार्टी हो - लेकिन ये मामला देश के सभी राजनीतिक दलों के लिए जोर जोर से खतरे की घंटी बजा रहा है, खासतौर से क्षेत्रीय दलों के लिए.
करीब छह महीने पहले सुप्रीम कोर्ट में पहली बार ये मामला उठा था. अक्टूबर, 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय से सवाल किया था कि दिल्ली शराब नीति केस में अगर आम आदमी पार्टी को फायदा हुआ है, तो उसे आरोपी क्यों नहीं बनाया गया?
और उसके बाद से ही प्रवर्तन निदेशालय इसके कानूनी पहलुओं पर विचार करने लगा था. जब अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी गिरफ्तारी और रिमांड को चैलेंज किया तो सुनवाई के दौरान केस को मजबूत करने के लिए ईडी ने दावा किया कि शराब घोटाले से आम आदमी पार्टी को फायदा हुआ है. इस तरह आम आदमी पार्टी ने अपराध किया है - और दिल्ली हाई कोर्ट ने ईडी की ये बात मान भी ली.
ऐसा होते ही अब आम आदमी पार्टी को भी दिल्ली शराब नीति केस में आरोपी बनाने का रास्ता साफ हो गया है. हाई कोर्ट के फैसले से ये साफ हो गया है कि दिल्ली शराब घोटाला केस में पूरी आम आदमी पार्टी ही जांच के दायरे में आ सकती है - दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने फैसले में माना है कि राजनीतिक दल होते हुए भी आम आदमी पार्टी एक कंपनी जैसी ही है.
अब बात जब हाई कोर्ट से 'निकली है तो दूर तलक जाएगी' - मतलब, अगर कोई भी राजनीतिक दल ऐसे कथित घोटाले या भ्रष्टाचार की जांच के दायरे में आ सकता है. जाहिर है, उसके जिम्मेदार पदाधिकारी भी जांच के दायरे होंगे - और क्षेत्रीय दलों के लिए तो और भी मुश्किल खड़ी हो सकती है.
राजनीतिक दल या प्राइवेट लिमिटेड कंपनी?

दिल्ली में कांग्रेस द्वारा मनरेगा बचाओ आंदोलन तेज़ी से जारी है. 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय के सामने बड़ी संख्या में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता एकत्रित हुए हैं. यह विरोध प्रदर्शन मनरेगा कानून में किए जा रहे बदलावों के खिलाफ किया जा रहा है. मनरेगा योजना के तहत मजदूरों को रोजगार देने वाली इस योजना में बदलावों को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की है.

भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते ने क्षेत्रीय आर्थिक समीकरणों में बड़ा बदलाव ला दिया है. इस ऐतिहासिक डील से पाकिस्तान को निर्यात के क्षेत्र में चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने इस डील से पैदा हुए संभावित नकारात्मक प्रभाव से निपटने के लिए यूरोपीय अधिकारियों से संपर्क किया है. यह समझौता दोनों पक्षों के आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करेगा.

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मियां मुसलमानों को लेकर फिर से विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि अगर राज्य के मियां मुसलमानों को परेशान करना हो तो वह रात दो बजे तक जाकर भी परेशान कर सकते हैं. इसके साथ ही उन्होंने मियां मुसलमानों को पांच रुपए देने की बजाय चार रुपए देने की बात कह कर विवादों को जन्म दिया है. इसपर पर अब विपक्ष हमलावर है.

अमेरिका ने ब्रिटेन, फ्रांस,इजरायल और चार अरब देशों के साथ मिलकर ईरान पर हमले की गुप्त टारगेट लिस्ट तैयार की है. मेन टारगेट न्यूक्लियर साइट्स (फोर्डो, नंटाज, इस्फाहान), IRGC कमांडर्स, बैलिस्टिक मिसाइल फैक्ट्रीज और स्ट्रैटेजिक बेस हैं. ट्रंप ने प्रदर्शनों और न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर धमकी दी है, लेकिन अभी हमला नहीं हुआ. अरब देश युद्ध से डर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी द्वारा लागू किए गए नए नियमों पर रोक लगा दी है. छात्रों ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा कि यूजीसी का यह कानून छात्रों में भेदभाव उत्पन्न करता है. छात्रों का कहना है कि वे नियमों में बदलाव नहीं बल्कि पुराने नियमों को वापस चाहते हैं. यदि नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया तो वे भविष्य में भी प्रदर्शन जारी रखेंगे.

जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के बाद उनके पैतृक गांव में समाधि दी जाएगी. जुकाम के इलाज में लगाए गए इंजेक्शन के महज 30 सेकंड बाद तबीयत बिगड़ने से मौत का दावा किया जा रहा है. घटना से संत समाज में गहरी नाराजगी है. संतों ने निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सोशल मीडिया पर अनर्गल लिखने वालों पर कार्रवाई की मांग की है.

दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने सार्वजनिक शिकायतों के निपटारे में लापरवाही के आरोपों पर राजेंद्र नगर, कन्हैया नगर और अशोक विहार के जोनल रेवेन्यू अधिकारियों और कन्हैया नगर के एक असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर को सस्पेंड कर दिया. अचानक निरीक्षण में प्रशासनिक खामियां मिलने के बाद उन्होंने विभागीय कार्रवाई और प्रभावित जोनों में तत्काल नए अधिकारियों की तैनाती के आदेश दिए हैं.

देश के शिक्षण संस्थानों में दलित और आदिवासी छात्रों और शिक्षकों के साथ होने वाले भेदभाव को खत्म करने के लिए विश्विद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नए नियम लागू किए थे, जिसे लेकर विरोध इतना बढ़ गया कि मामला अदालत तक पहुंच गया. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है, जिसे लेकर राजनीतिक दलों के नजरिए अलग-अलग दिखे.





