
किसान आंदोलन, सिख और अब कृषि कानून... कंगना रनौत के वो बयान, जो बीजेपी के लिए बन गए मुसीबत!
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मंडी से बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने फिर किसानों को लेकर बयान दिया था. उन्होंने तीन कृषि कानूनों की वापसी की मांग की है. कंगना ने इन कानूनों को किसानों के हित में बताया और कहा, इन्हें फिर से लागू किया जाना चाहिए. किसान खुद इन कानूनों की मांग करें ताकि उनकी प्रगति बाधित ना हो. 2021 में किसानों के विरोध प्रदर्शनों के बाद ये कानून वापस ले लिए गए थे.
बॉलीवुड एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद कंगना रनौत फिर चर्चा में हैं. उन्होंने वापस लिए गए तीनों कृषि कानून फिर लागू करने की मांग उठाई है. कंगना के बयान पर विपक्ष हमलावर हो गया है और विरोध कर रहा है. हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब कंगना ने किसानों से जुड़े मामले में टिप्पणी की है. तीन साल पहले उन्होंने महिला आंदोलनकारियों पर पैसे लेकर धरने पर बैठने का आरोप लगाया था. उसके बाद उन्होंने सिखों को लेकर भी विवादास्पद टिप्पणी की थी.
महीनेभर भीतर यह दूसरी बार है जब बीजेपी ने कंगना की टिप्पणियों से खुद को अलग कर लिया है. इस बार भी बीजेपी ने कंगना के बयान को 'व्यक्तिगत बयान' बताया है. आइए जानते हैं कंगना के विवादित बयान....
कंगना रनौत हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से बीजेपी सांसद हैं. उन्होंने इसी साल बीजेपी जॉइन की थी. कंगना ने लोकसभा चुनाव में पॉलिटिकल डेब्यू किया और कांग्रेस नेता, हिमाचल प्रदेश सरकार में मंत्री विक्रमादित्य सिंह को हराया. विक्रमादित्य, पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बेटे हैं. विक्रमादित्य की मां प्रतिभा सिंह मंडी से कांग्रेस सांसद रही हैं.
कंगना के वो बयान, जो विवादों में आए?
24 सितंबर 2024
बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने मंगलवार को यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि तीनों विवादास्पद कृषि कानून को फिर से लागू करना चाहिए. कंगना का कहना था कि किसानों को खुद ये कानून लागू करने की मांग करना चाहिए. कंगना का कहना था कि मुझे पता है कि यह बयान विवादास्पद हो सकता है लेकिन तीन कृषि कानूनों को वापस लाया जाना चाहिए. किसानों को खुद इसकी मांग करनी चाहिए. कंगना ने तर्क दिया कि किसानों के लिए तीनों कानून फायदेमंद थे, लेकिन कुछ राज्यों में किसान संगठनों के विरोध के कारण सरकार ने उन्हें निरस्त कर दिया. उन्होंने कहा, किसान देश के विकास में ताकत का स्तंभ हैं. मैं उनसे अपील करना चाहती हूं कि वे अपने भले के लिए कानूनों को वापस लेने की मांग करें.

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