
'कानून की सुस्ती आप में नहीं झलकनी चाहिए' नागपुर में लॉ स्टूडेंट्स से बोले CJI चंद्रचूड़
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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शनिवार को महाराष्ट्र के नागपुर पहुंचे. यहां वे महाराष्ट्र लॉ यूनिवर्सिटी के पहले दीक्षांत समारोह में शामिल हुए और लॉ स्टूडेंट्स को संबोधित किया. सीजेआई ने कहा- यदि कानून के युवा छात्रों और स्नातकों को संवैधानिक मूल्यों द्वारा निर्देशित किया जाता है तो वे असफल नहीं होंगे.
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को नागपुर में देश के संविधान को लेकर बड़ी बातें कही हैं. उन्होंने कानून के छात्रों को संविधान से परिचित कराया और भरोसा दिलाया कि संवैधानिक मूल्यों का पालन करने से कभी आप असफल नहीं होंगे. उन्होंने छात्रों को एक बड़े लक्ष्य की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित किया. CJI यहां महाराष्ट्र लॉ यूनिवर्सिटी के पहले दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे.
CJJ ने कहा कि भारत के नागरिक के रूप में और वकीलों के रूप में यह सुनिश्चित करना हमारा कर्तव्य है कि हमारे साथी वास्तव में नागरिक और सही शब्द के अर्थों में नागरिक हों, ना कि केवल कागज पर. सीजेआई ने होमोसेक्सुएलिटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का भी जिक्र किया.
सीजेआई ने 2016 के ऐतिहासिक LGBTQ (लेस्बियन, गे, बाईसेक्शुअल, ट्रांस्जेंडर, क्वीर) अधिकारों के फैसले का उल्लेख किया और देरी होने पर दुख भी जताया. CJI ने कहा- कानून की दुर्भाग्यपूर्ण प्रकृति यह है कि यह निष्क्रियता से भरा हुआ है और जब आप वकील के रूप में सफल होते हैं और निष्क्रिय व्यक्ति होने के लिए जज बन जाते हैं तो आपको लाखों बहाने मिलेंगे, क्योंकि जड़ता विशेषाधिकार प्राप्त लोगों का विशेषाधिकार है. लेकिन कानून की सुस्ती आप में नहीं झलकनी चाहिए. जब संवैधानिक मूल्यों और संवैधानिक संस्कृति के पोषण की बात आती है तो सबसे आगे रहें और अपने स्वयं के उदाहरण से आगे बढ़ें.
'न्याय करो, दान नहीं'
उन्होंने न्याय और दान के बीच अंतर भी समझाया. CJI ने कहा- न्याय इस धारणा में दृढ़ता से निहित है कि सभी लोगों के पास कुछ हस्तांतरणीय अधिकार (alienable rights) हैं. दूसरी ओर दान उस व्यक्ति की महानता पर आधारित है जो परोपकारी है. न्याय-अन्याय के मूल कारण से निपटता है, लेकिन परोपकार सिर्फ अन्याय के परिणामों या लक्षणों को संबोधित करता है.
उन्होंने आगे कहा- न्याय का उद्देश्य कम्युनिटी को सशक्त बनाना है और उन्हें आत्मनिर्भर और उन सभी अधिकारों को प्राप्त करने में सक्षम बनाना है, जिनके वे हकदार हैं, जबकि चैरिटी न्याय से उत्पन्न होने वाली पीड़ा को क्षण भर के लिए बढ़ा देती है. इसलिए, वकीलों के रूप में आपके जीवन में, मैं आपसे अपील करता हूं कि आप अपने काम को चाहे वकील के रूप में या बाद में जज के रूप में दान करने वाले व्यक्तियों के रूप में न मानें, बल्कि ऐसे व्यक्ति बनने की कोशिश करें, जो एक ऐसा वातावरण बनाने के लिए जिम्मेदार हो, जिसमें हर नागरिक को न्याय दिया जा सके.

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