
कनाडा की सड़कों पर क्यों उतरे इंडियन स्टूडेंट्स, ट्रूडो सरकार के नए नियम से क्या होगा असर?
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छात्रों के अधिकारों की वकालत करने वाले एक संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि ट्रूडो सरकार की संघीय नीति में बदलाव की वजह से 70,000 से अधिक छात्रों को डिपोर्टेशन का डर सता रहा है क्योंकि इन छात्रों का वर्क परमिट वीजा इस साल के अंत में खत्म होने जा रहा है.
कनाडा में हजारों की संख्या में अंतर्राष्ट्रीय छात्र सड़कों पर उतरे हुए हैं. इन छात्रों को कनाडा सरकार की इमिग्रेशन पॉलिसी में बदलाव की वजह से डिपोर्टेशन का डर सता रहा है. यही वजह है कि ट्रूडो सरकार की पॉलिसी में इस बदलाव के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है.
कनाडा सरकार ने अब उन क्षेत्रों में विदेशी कामगारों को परमिट नहीं देना का फैसला किया है, जहां बेरोजगारी दर छह फीसदी या उससे अधिक है. कम वेतन वाली अस्थाई नकरियों के लिए परमिट दो के बजाए अब एक साल के लिए जारी होगा. इसका मतलब ये हुआ कि कनाडा में अब अप्रवासियों की संख्या को नियंत्रित किया जाएगा.
इन नए नियमों को लेकर कनाडा के चार प्रांतों ओंटारियो, मैनीटोबा, प्रिंस एडवर्ड आइलैंड और ब्रिटिश कोलंबिया में भारतीय स्टूडेंट्स का प्रदर्शन जारी है.
भारतीय छात्र क्यों कर रहे हैं प्रोटेस्ट?
कनाडा में बड़ी संख्या में भारतीय छात्र पढ़ाई करते हैं. हर साल बड़ी संख्या में भारतीय उच्च शिक्षा के लिए कनाडा का रुख करते हैं. लेकिन ट्रूडो सरकार की नीतियों में बदलाव की वजह से भारतीय छात्र खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं. कनाडा में पढ़ाई कर रहे एक भारतीय छात्र महकदीप सिंह ने बताया कि मैंने कनाडा आने के लिए छह साल का इंतजार किया था. मैंने यहां पढ़ाई की, काम कर रही हूं, टैक्स चुका रही हूं लेकिन कनाडा सरकार को हमारी कोई परवाह ही नहीं है.
छात्रों के अधिकारों की वकालत करने वाले एक संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि ट्रूडो सरकार की संघीय नीति में बदलाव की वजह से 70,000 से अधिक छात्रों को डिपोर्टेशन का डर सता रहा है क्योंकि इन छात्रों का वर्क परमिट वीजा इस साल के अंत में खत्म होने जा रहा है.

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