
कतर का एक फैसला... गंभीर संकट में आए पाकिस्तान-बांग्लादेश, भारत पर भी असर!
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बांग्लादेश पहले से ही एनर्जी कमी से जूझ रहे हैं. इस बीच, कतर ने ऊर्जा के प्रोडक्शन को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे बांग्लादेश-पाकिस्तान पर तत्काल ऊर्जा संकट आ चुका है. भारत पर भी इसका असर पड़ सकता है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के दौरान कतर की प्लांटों पर ईरान ने कई हमले किए हैं, जिसके बाद कतर ने एक ऐसा फैसला लिया, जिससे एशियाई आपूर्ति बाधित हो गई है. खासकर पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देश तो संकट के साए में आ गए हैं और इनके पास बहुत ज्यादा विकल्प भी नहीं हैं.
दरअसल, ईरानी हमले के बाद कतर ने LNG सप्लाई और उत्पादन को बंद कर दिया है. कतर के इस कदम से यूरोप और एशियाई मार्केट में गैस के दाम में भारी उछाल आई है. पाकिस्तान और बांग्लादेश के लिए तो ऊर्जा का तत्काल संकट आ चुका है, क्योंकि ये कतर की एनर्जी सप्लाई पर पूरी तरह से निर्भर थे.
80% हिस्सा एशिया में खपत एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, कतर और संयुक्त अरब अमीरात मिलकर पाकिस्तान के LNG आयात का 99%, बांग्लादेश का 72% और भारत का 53% का आपूर्ति जरूरत को पूरा करते हैं. एशिया कतर की गैस का प्रमुख डेस्टिनेशन है, इस क्षेत्र में कतर के एलएनजी शिपमेंट का 80% से अधिक हिस्सा खपत होता है, जो संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी उत्पादक है.
पाकिस्तान और बांग्लादेश के पास सीमित भंडार इस व्यवधान से पाकिस्तान और बांग्लादेश के लिए तत्काल चुनौती खड़ी हो गई है, जिनके पास आपूर्ति का सीमित भंडार है. केप्लर के प्रमुख इनसाइट विश्लेषक गो कातायामा ने सीएनबीसी को बताया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश के पास भंडारण और खरीद की सीमित लचीलता है.
बांग्लादेश पहले से ही अपनी गैस प्रणाली में संरचनात्मक कमी का सामना कर रहा है. ऊर्जा अर्थशास्त्र और वित्तीय विश्लेषण संस्थान के अनुसार, देश में प्रतिदिन 1,300 मिलियन घन फीट से अधिक गैस की कमी है. ऐसे में कतर का यह कदम और संकट पैदा कर रहा है.
इंडस्ट्री पर संकट सरकारी कंपनी पेट्रोबांग्ला के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने से गर्मी के चरम मौसम के करीब आने पर बिजली उत्पादन और औद्योगिक उत्पादन पर दबाव पड़ेगा. अधिकारी ने बताया कि मार्च के लिए बांग्लादेश को कतर से मिलने वाले नौ निर्धारित एलएनजी कार्गो में से चार पहले ही होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं, जबकि अधिकारी स्पॉट मार्केट से अतिरिक्त कार्गो प्राप्त करने का प्रयास कर सकते हैं. बांग्लादेश के लिए इसकी कीमतें कई गुना बढ़ सकती हैं, जो उसके पहुंच से बाहर हो सकती हैं.













