
उम्र 70 पार, जेल में गुजरे 15 साल... अब अदालत से रहम की भीख मांग रहा ये अंडरवर्ल्ड डॉन
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अरुण गवली ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच के सामने याचिका दायर कर रहम की भीख मांगी है. अरुण गवली ने अपने फेफड़ों और पेट से संबंधित बीमारी का उल्लेख करते हुए सजा को माफ किए जाने की अपील की है. न्यायमूर्ति विनय जोशी और न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेजेस की खंडपीठ ने अरुण गवली की याचिका पर सरकार को नोटिस जारी किया है.
कत्ल के एक मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे अंडरवर्ल्ड डॉन अरुण गवली ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच के सामने याचिका दायर कर रहम की भीख मांगी है. अरुण गवली ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच में याचिका दायर कर महाराष्ट्र सरकार के गृह विभाग की ओर से साल 2006 में जारी एक सर्कुलर का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया था कि जिन दोषियों ने चौदह साल की कैद की सजा काट ली है और उनकी उम्र 65 साल हो चुकी है, उन्हें जेल से रिहा किया जा सकता है.
क्या कहती है गवली की याचिका
अंडरवर्ल्ड डॉन अरुण गवली मई 2008 से जेल में बंद है. उसने अदालत में याचिका दायर कर कहा है कि वह अब 70 वर्ष का हो गया है. दरअसल, साल 2006 में महाराष्ट्र सरकार ने एक सर्कुलर जारी किया था. उसी का उल्लेख करते हुए उसने कहा कि 20 जनवरी 2006 की सरकारी अधिसूचना के अनुसार वो 14 साल की कैद पूरी होने के बाद रिहा होने का हकदार है, क्योंकि उसने 65 वर्ष से अधिक की आयु पूरी कर ली है और वह पुरानी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित है.
रिट याचिका में महाराष्ट्र सरकार के 2015 के एक सर्कुलर का भी उल्लेख किया गया है. जिसमें कहा गया है कि महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत बुक किए गए अपराधी इसके हकदार नहीं हैं और उन्हें 2006 की अधिसूचना से छूट दी गई है. गवली ने महाराष्ट्र कारागार (सजाओं की समीक्षा) नियम, 1972 के नियम-6 के उप-नियम (4) की पूर्वव्यापी प्रयोज्यता को चुनौती दी है, जिसे 1 दिसंबर, 2015 की अधिसूचना के माध्यम से जोड़ा गया था. इसके नियम 6 के तहत 20 जनवरी, 2006 को मकोका अधिनियम के तहत दोषी ठहराए गए व्यक्तियों को अधिसूचना का लाभ लेने के लिए संशोधित किया गया था. रिट याचिका में उल्लेख किया गया है कि गवली को 2012 में दोषी ठहराया गया था, इसलिए 2015 की अधिसूचना उस पर लागू नहीं होती है.
गवली ने रिट याचिका में अपने फेफड़ों और पेट से संबंधित बीमारी का उल्लेख करते हुए अपनी सजा को माफ किए जाने की प्रार्थना की है. न्यायमूर्ति विनय जोशी और न्यायमूर्ति वाल्मीकि मेनेजेस की खंडपीठ ने अरुण गवली की दायर याचिका पर नोटिस जारी किया है और 15 मार्च तक उसका जवाब देने के लिए कहा है.
ये था पूरा मामला

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