
ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता: महायुद्ध या शांति? जिनेवा में होने वाली बातचीत पर टिकी दुनिया की निगाहें
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ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर गहराता वैश्विक तनाव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. मंगलवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय वार्ता होने जा रही है. ये बातचीत मध्य-पूर्व में शांति का भविष्य तय करेगी. वहीं, बातचीत से ठीक पहले अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी भारी सैन्य तैनाती कर दी है, जिससे युद्ध की आशंका भी बनी हुई है.
ईरान का परमाणु कार्यक्रम पिछले ढाई दशकों से वैश्विक राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है. अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का दावा है कि तेहरान परमाणु बम बनाने की फिराक में है, जबकि ईरान इसे शांतिपूर्ण कार्यों के लिए बताता आ रहा है. अब मंगलवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में दोनों देशों के बीच अहम वार्ता होने जा रही है. इस बातचीत में अमेरिका ईरान से यूरेनियम संवर्धन खत्म करने और अपनी मिसाइलों की रेंज सीमित करने की मांग करेगा. बदले में तेहरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में छूट दी जा सकती है. यदि ये बातचीत विफल होती है, तो मिडिल ईस्ट में एक बड़ा सैन्य संघर्ष शुरू होने का खतरा है.
दरअसल, अमेरिका को डर है कि अगर ईरान परमाणु बम बना लेता है तो उससे पूरे मध्य-पूर्व को खतरा हो सकता है. ईरान की दुश्मनी, जहां इजरायल से पुरानी है. वहीं, सऊदी अरब से भी ईरान के कई मुद्दों पर तनाव है...इजरायल और सऊदी अरब दोनों अमेरिका के सहयोगी देश हैं....ये दोनों देश भी नहीं चाहते की ईरान इतना शक्तिशाली बन जाए की उनके लिए सुरक्षा चुनौतियां खड़ी हो जाए.
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक जिनेवा में होने वाली बातचीत में अमेरिका ईरान से मांग करेगा कि तेहरान यूरेनियम संवर्धन को खत्म करें, या बेहद कम कर दे...बदले में अमेरिका तेहरान पर लगे प्रतिबंधों में छूट दे सकता है. साथ ही अमेरिका ईरान से उसके मिसाइल कार्यक्रम को रोकने या मिसाइलों की रेंज सीमित करने की मांग करेगा.
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी IAEA के मुताबिक, ईरान ने यूरेनियम संवर्धन की दर को बढ़ा कर 60 प्रतिशत तक पहुंचा दिया है. ये बिजली उत्पादन के लिए जरूरी 4.5 प्रतिशत से बहुत ज्यादा और परमाणु हथियार बनाने के लिए जरूरी 90 प्रतिशत के काफी करीब है. वहीं, ईरान के मिसाइलों की जद में पूरा इजरायल आ चुका है....यानी ईरान के पास वो क्षमता है, जिससे वो इजरायल के अंदर कहीं भी हमला कर सकता है. ऐसे में अमेरिका हर हाल में ईरान पर दबाव डालेगा कि वो अपने परमाणु कार्यक्रम को रोके. और मिसाइलों की रेंज को सीमित करे.
ईरान के पास अमेरिका की भारी सैन्य तैनाती
इस बातचीत से पहले अमेरिका ने अपने विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन को मध्य-पूर्व में तैनात कर दिया है और रविवार को अमेरिकी सैनिकों ने ईरान पर संभावित हमले का अभ्यास भी किया है....अमेरिकी अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप का आदेश आते ही सैन्य कार्रवाई शुरू हो जाएगी...यही नहीं, अमेरिका अपने सबसे बड़े विमानवाहक पोत USS गेराल्ड आर. फोड को भी मध्य-पूर्व के लिए रवाना कर चुका है, जिसमें हजारों सैनिक, लड़ाकू विमान, गाइडेड मिसाइल सहित कई हथियार भेजे गए हैं..कहा जा रहा है कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने और मिसाइल कार्यक्रमों को सीमित करने पर राजी नहीं होता तो राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बमबारी के आदेश दे सकते हैं.

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को कहा कि वैश्विक आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों को कम करने में मदद करने के लिए अमेरिका जल्द ही टैंकरों में फंसे ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटा सकता है. बेसेंट ने कहा कि प्रतिबंधित ईरानी तेल के वैश्विक आपूर्ति में शामिल होने से अगले 10 से 14 दिनों तक तेल की कीमतें कम रखने में मदद मिलेगी.

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