
इमरान खान को झटका, पाकिस्तान के खिलाफ यूरोप ने उठाया ये कदम
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यूरोपीय संसद ने इस हफ्ते एक प्रस्ताव स्वीकार किया है जिसमें पाकिस्तान के साथ व्यापारिक रिश्तों की समीक्षा करने और पाकिस्तान का सामान्य वरीयता वाला दर्जा (GSP) की योग्यता को खत्म करने की मांग की गई है.
पाकिस्तान की इमरान सरकार का दांव उलटा पड़ता नजर आ रहा है. पाकिस्तान सरकार ने कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) के आगे घुटने टेकते हुए संसद में फ्रांसीसी दूत के निष्कासन पर एक प्रस्ताव लाने का ऐलान किया था. साथ ही यूरोपीय देशों में ईंशनिंदा कानून बनाने की वकालत की थी, लेकिन प्रधानमंत्री इमरान खान का ये कदम पाकिस्तान के लिए उल्टा साबित होता हुआ दिख रहा है. (फाइल फोटो-Getty Images) असल में, यूरोपीय संसद ने एक प्रस्ताव स्वीकार किया है जिसमें पाकिस्तान के साथ व्यापारिक रिश्तों की समीक्षा करने और पाकिस्तान का सामान्य वरीयता वाला दर्जा (GSP) खत्म करने की मांग की गई है. पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने मुस्लिम देशों से ईंशनिंदा के मामलों को पश्चिमी देशों के सामने उठाने की बात कही थी. उन्होंने यूरोपीय देशों में ईंशनिंदा कानून बनाने की मांग की थी. लेकिन अभी यूरोपीय संसद में ही ईंशनिंदा कानून को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ प्रस्ताव स्वीकार किया गया है. (फाइल फोटो-AP) Blasphemy law abuse: EU parliament adopts resolution calling for review of Pakistan’s GSP+ status - World - Business Recorder https://t.co/Dq2b70Sef4
ट्रंप ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि मुझे यूरोप से प्यार है लेकिन वह सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रहा है. दुनिया हमें फॉलो कर बर्बादी के रास्ते से बच सकती है. मैंने कई मुल्कों को बर्बाद होते देखा है. यूरोप में मास माइग्रेशन हो रहा है. अभी वो समझ नहीं रहे हैं कि इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं. यूरोपीयन यूनियन को मेरी सरकार से सीखना चाहिए.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में ग्रीनलैंड को लेकर बड़ा प्रस्ताव रखा है. उन्होंने साफ कहा है कि अगर ग्रीनलैंड अमेरिका को नहीं दिया गया तो वे यूरोप के आठ बड़े देशों पर टैरिफ लगाएं जाएंगे. इस स्थिति ने यूरोप और डेनमार्क को ट्रंप के खिलाफ खड़ा कर दिया है. यूरोप और डेनमार्क ने स्पष्ट कर दिया है कि वे ट्रंप के इस ब्लैकमेल को बर्दाश्त नहीं करेंगे.

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स्विटजरलैंड के दावोस में चल रहे WEF की बैठक में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप को बताया कि अमेरिका जैसी शक्ति को क्यों कानून आधारित वर्ल्ड ऑर्डर का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में बहुपक्षवाद के बिखरने का डर सता रहा है. मैक्रों ने कहा कि दुनिया में जोर जबरदस्ती के बजाय सम्मान और नियम-आधारित व्यवस्था को प्राथमिकता देने की जरूरत है.

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