
इमरान खान की उम्मीदों पर चुनाव आयोग का चाबुक, दोनों सीटों से नामांकन खारिज
AajTak
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान इस बार चुनाव नहीं लड़ पाएंगे. इमरान ने लाहौर और मियांवाली सीट से चुनाव लड़ने के लिए नामांकन किया था, लेकिन नामांकन पत्र की जांच के आखिरी दिन इमरान समेत कई पीटीआई नेताओं का पर्चा खारिज कर दिया गया.
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की उम्मीदों पर चुनाव आयोग का चाबुक चला है. पाकिस्तान में 8 फरवरी को आम चुनाव होने हैं, इससे पहले इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) को बड़ा झटका लगा है. नामांकन पत्रों की जांच के आखिरी दिन पाकिस्तान चुनाव आयोग ने शनिवार को इमरान समेत कई दिग्गज नेताओं के नामांकन खारिज कर दिए. आयोग ने इन नामांकन को 'कमजोर आधार' बताकर खारिज किया है.
चुनाव आयोग के अधिकारियों ने पीटीआई संस्थापक इमरान खान की दो राष्ट्रीय असेंबली सीटों लाहौर और मियांवाली से नामांकन खारिज कर दिया है. तोशाखाना मामले में दोषी ठहराए जाने के कारण के अलावा उनके नामांकन पत्र के खिलाफ आपत्ति उठाई गई क्योंकि इमरान के प्रस्तावक और अनुमोदक संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों से नहीं थे. हालांकि इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने खान की सजा को निलंबित कर दिया था, लेकिन उनकी अयोग्यता अभी भी कायम है.
पाकिस्तान में इमरान खान की पार्टी को चुनाव आयोग ने क्यों बताया लीडरलेस? जानिए पूरा मामला
इमरान के खिलाफ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के मियां नसीर ने आपत्ति जताई थी, जिसमें तोशाखाना मामले में पूर्व पीएम की 5 साल की अयोग्यता का उल्लेख किया गया था. इमरान और उनकी पार्टी के सीनियर सहयोगी शाह महमूद कुरैशी 9 मई के दंगों के बाद कई मामलों में गिरफ्तारियों का सामना कर रहे हैं और दोनों रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं. हाल ही में शाह महमूद कुरैशी को 9 मई के हमला मामले में 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था.
पाकिस्तान में चुनाव से पहले इमरान खान को राहत, कानूनी लड़ाई में वापस मिला 'बल्ला'
कुरैशी समेत कई नेताओं के नामांकन हुए रद्द

ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. अयातुल्ला अली खामेनेई की हुकूमत ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए फांसी जैसे खौफनाक कदम उठाने का फैसला किया तो अमेरिका ने सीधे एक्शन की चेतावनी दे डाली. हालांकि बाद में ईरान और ट्रंप के ताजा बयानों ने दुनिया को थोड़ी राहत दी. मगर ईरान संकट अब सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक टकराव का संकेत बनता जा रहा है.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया है जो पहले वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को मिला था. मचाडो ने यह पुरस्कार ट्रंप को सौंपा और ट्रंप ने इसे खुशी-खुशी स्वीकार किया. यह घटना राजनीतिक जगत में खास तूल पकड़ रही है और दोनों नेताओं के बीच इस सम्मान के आदान-प्रदान ने चर्चा का विषय बना है. ट्रंप के लिए यह एक बड़ा सम्मान है जिसका उन्होंने खुले दिल से स्वागत किया.

अमेरिका ने ईरान पर हमले की चेतावनी के बाद अपने कदम फिलहाल वापस ले लिए हैं. हाल तक अमेरिका ईरान की हवाई और समुद्री घेराबंदी कर रहा था, लेकिन अब उसने मामले को डिप्लोमेसी के माध्यम से सुलझाने का अंतिम मौका दिया है. ईरान ने प्रदर्शनकारियों को फांसी देने का फैसला किया था, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने आर्मी को हमले के लिए तैयार रहने का आदेश दिया था.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की उनकी योजना का समर्थन न करने वाले देशों पर टैरिफ लगाया जा सकता है. इस बयान से यूरोपीय सहयोगियों के साथ तनाव बढ़ गया है. अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच बातचीत जारी है, जबकि डेनमार्क और कई यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का फैसला किया है.

पाकिस्तान एक बार फिर भारत की सीमा में ड्रोन भेज रहा है. जनवरी से जम्मू कश्मीर के कई इलाकों में छोटे और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन देखे गए हैं. सेना के मुताबिक ये आत्मघाती ड्रोन नहीं बल्कि निगरानी के लिए भेजे गए यूएवी हैं. माना जा रहा है कि पाकिस्तान भारत की सुरक्षा तैयारियों और प्रतिक्रिया समय को परखने की कोशिश कर रहा है.








