
इजरायल ने कहा, बंधकों की रिहाई में अभी देरी... 24 घंटे में समझौता प्रक्रिया को दिया जाएगा अंतिम रूप
AajTak
हमास और इजरायल में अहम डील हो गई है. बंधकों की रिहाई को लेकर डील पर बात बन गई है. लेकिन, यह समझौता प्रक्रिया शुक्रवार तक पूरी हो पाना संभव नहीं है. खुद इजरायल ने देरी होने को लेकर बयान दिया है. अमेरिका ने कतर की मदद से ये डील फाइनल कराई. इसके तहत चार दिन तक का युद्ध विराम होगा. इस दौरान कुल 50 बंधकों की रिहाई होगी. इजरायल इसके बदले में 150 कैदी फिलिस्तीनियों की रिहाई करेगा.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के करीबी सहयोगी और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष तजाची हानेग्बी ने बड़ा ऐलान किया है. उन्होंने कहा कि बंधकों की रिहाई शुक्रवार तक संभव नहीं है. हानेग्बी ने अपने बयान में कहा है कि हमारे बंधकों की रिहाई के लिए बातचीत लगातार आगे बढ़ रही है. उन्होंने आगे कहा, रिहाई मूल समझौते के अनुसार शुरू होगी और यह शुक्रवार से पहले नहीं हो पाएगी.
इससे पहले हमास के लीडर मौसा अबू मरजौक ने कहा था, यह समझौता गुरुवार को सुबह 10 बजे लागू होगा. लेकिन, कुछ घंटे बाद वरिष्ठ इजरायली अधिकारी ने समझौते में देरी की जानकारी की पुष्टि की है.
'कतर में हैं इजरायल के टॉप अधिकारी'
एक सरकारी सूत्र का यह भी कहना है कि यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि क्या मोसाद प्रमुख डेविड बार्निया और आईडीएफ जनरल नित्जन एलोन को रिहा होने वाले बंधकों के नाम पहले ही मिल गए हैं. बता दें कि बार्निया और एलोन इस समय समझौते के अंतिम विवरण को मजबूत करने के लिए कतर में हैं.
'रिहाई से पहले नाम नहीं बताएगा इजरायल'
हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि यदि समझौता विफल हो जाता है तो परिवारों के बीच किसी भी झूठी आशा से बचने के लिए इजरायल रिहाई से पहले अपने नागरिकों के नाम जारी नहीं करेगा. सूत्र का यह भी कहना है कि संघर्ष विराम दस्तावेज पर अभी भी दोनों पक्षों की तरफ से हस्ताक्षर किए जाना बाकी है. जिसे अगले 24 घंटे में अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है.

ईरान ने भी अपनी मिसाइल ताकत को दुनिया के सामने पेश किया है और ईरान ने हिंद महासागर में मौजूद ब्रिटेन के सैन्य बेस पर अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर दो लॉन्ग रेंज मिसाइलों से हमला किया है. हम आपको बता दें कि ईरान से दिएगो गार्सिया की दूरी करीब 4 हजार किलोमीटर है. ईरान ने दिएगो गार्सिया की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी जिसमे एक को बीच में ही नष्ट करने का दावा किया जा रहा है.

अमेरिका ने ईरानी तेल पर 30 दिन की छूट दी, लेकिन ईरान ने एक्स्ट्रा तेल होने से इनकार कर दिया. दोनों के दावों से वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है. दुनियाभर के मुल्क ये उम्मीद लगाए बैठे हैं कि अमेरिकी की ओर से छूट मिलने के बाद ईरान का तेल उन्हें मिलेगा. लेकिन, ईरान के बयान से सभी को बड़ा झटका लगा है.

ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिकी और ब्रिटिश संयुक्त सैन्य बेस डिएगो गार्सिया पर हमला किया है. मध्यपूर्व की सीमाओं से दूर किसी अमेरिकी ठिकाने पर ये ईरान का अबतक का सबसे बड़ा हमला है. वहीं ईरान ने ब्रिटेन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ब्रिटेन अमेरिका को ब्रिटिश सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने देता है तो इसे सीधे आक्रामक कार्रवाई में भागीदार माना जाएगा.

ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिकी और ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य बेस डिएगो गार्सिया पर मिसाइल हमला किया है. मध्यपूर्व की सीमाओं से दूर किसी अमेरिकी ठिकाने पर ये ईरान काअबक का सबसे बजड़ा हमला है. डिएगो गारर्सिया बोहद रणनीतिक सैन्य अड्डा है. B-52 बॉम्बर विमान, लंबी दूरी के हमले के हथियार इस बेस पर मौजूद है.









