
इजरायल-ईरान यात्रा न करने की सलाह जारी, कितनी सख्त होती है ट्रैवल एडवायजरी, न मानने पर क्या होता है?
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इजरायल- ईरान में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपने नागरिकों से इन देशों की यात्रा न करने पर एडवायजरी जारी की. अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस जैसे कई दूसरे देश भी अपने नागरिकों के लिए चेतावनी निकाल चुके. ये वॉर्निंग तब दी जाती है, जब किसी देश में सफर करने पर जान का खतरा हो. लेकिन क्या हो अगर चेतावनी के बाद भी लोग यात्रा करें? तब कितनी मदद करती है सरकार?
ईरान के इजरायल पर हमले के बाद से दोनों के बीच युद्ध के कयास लग रहे हैं. अगर ऐसा हुआ तो इजरायल एक साथ दो मोर्चों पर लड़ रहा होगा. उसकी पहले से ही हमास से भी जंग जारी है. इन खतरों को देखते हुए भारत समेत कई देश ट्रैवल वॉर्निंग निकाल चुके. वे अपने लोगों को सचेत कर रहे हैं कि इन देशों की यात्रा करने से बचें. हालांकि ये पूरी तरह से बैन से अलग है.
क्या कहा भारत सरकार ने
भारत की तरफ से शुक्रवार को जारी एडवायजरी में कहा गया कि लोग अगली सूचना तक इजरायल और ईरान का ट्रैवल न करें. ये वॉर्निंग तब निकली है, जबकि इजरायल से काफी भारतीयों को निकाला जा चुका, साथ ही कई लोगों के अब भी फंसे होने की खबरें भी आ रही हैं. आगे ये भी कहा गया कि जो लोग वहां हैं, वे भारतीय दूतावासों में जाकर खुद को रजिस्टर करवाएं. इसके अलावा बाहर कम से कम निकलें, या निकलें भी तो किसी भी हाल में जोखिम वाली जगहों पर न जाएं.
क्या फर्क है बैन और एडवायजरी में
फ्रांस, अमेरिका और रूस जैसे देश भी ट्रैवल वॉर्निंग निकाल चुके. लेकिन ध्यान दें. ये ट्रैवल एडवायजरी है, न कि ट्रैवल बैन. बैन तब कहा जाता है जब कोई देश किसी दूसरे देश की यात्रा पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दे. वहां से न तो नागरिक उस देश जा सकते हैं, न ही वहां के लोग यहां आ सकते हैं. मसलन, उत्तर कोरिया को ही लें. ये देश अमेरिका से इतना नाराज रहता है कि वहां के लोगों का आना, और अपने लोगों का वहां जाना ही बैन कर रखा है. अगर घूमते-घामते कोई एडवेंचर प्रेमी अमेरिकी नॉर्थ कोरिया पहुंच जाए तो बहुत संभव है कि वो डिटेंशन कैंप में बंद हो जाएगा. ऐसी कई खबरें अक्सर आती रहीं.

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