
आसमान में साइबर अटैक! जानिए कैसे भारत का सबसे बिजी एयरपोर्ट बना टारगेट
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पिछले कुछ दिनों से राजधानी दिल्ली के एयरस्पेस में फर्जी सैटेलाइट सिग्नल मिलने के कई मामले सामने आए हैं, जिससे उड़ानें भटक गईं. कई डाइवर्ट हुईं और सैकड़ों फ्लाइट्स में देरी हुई. शुक्रवार को भी करीब 400 उड़ानें प्रभावित हुईं.
देश के सबसे व्यस्त इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) पर पिछले कुछ दिनों से GPS स्पूफिंग की संदिग्ध घटनाओं से हड़कंप मचा हुआ है. ऐसी घटनाएं आमतौर पर संघर्ष क्षेत्रों या संवेदनशील भारत-पाकिस्तान सीमा पर आम हैं, लेकिन इस सप्ताह दिल्ली एयरपोर्ट पर इसके मामले सामने आने से उड़ानें बाधित हुईं और कई उड़ानों को डायवर्ट करना पड़ा.
शुक्रवार को भी, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) प्रणाली में तकनीकी गड़बड़ी के कारण लगभग 400 उड़ानें प्रभावित हुईं, जिसका असर पूरे उत्तर भारत के कई हवाई अड्डों पर महसूस किया गया.
यह GPS स्पूफिंग की हालिया घटनाओं के बाद हुआ है, जिसके कारण मंगलवार को दिल्ली एयरपोर्ट दुनिया में दूसरी सबसे ज्यादा फ्लाइट डिस्टर्बेंस झेलने वाली जगह बन गया. कम से कम सात उड़ानों को जयपुर और लखनऊ जैसे पास के हवाई अड्डों पर डायवर्ट करना पड़ा.
क्या है GPS स्पूफिंग और क्यों बढ़ा खतरा? GPS स्पूफिंग एक तरह का साइबर हमला है. इसमें फर्जी सैटेलाइट सिग्नल भेजकर विमान या डिवाइस को गुमराह किया जाता है.मतलब - आपका फोन या विमान असली लोकेशन छोड़कर किसी दूसरी जगह दिखाने लगता है. GPS स्पूफिंग, GPS जैमिंग से अलग है. जहां जैमिंग में सिग्नल को ब्लॉक किया जाता है, वहीं स्पूफिंग में फर्जी सिग्नल भेजे जाते हैं ताकि विमान गुमराह हो जाए.
यह भी पढ़ें: क्या है सिग्नल स्पूफिंग... भारत-पाकिस्तान सीमा पर विमानों के लिए कैसे बन रहा खतरा?
उदाहरण के तौर पर, अगर कोई विमान दिल्ली के ऊपर उड़ रहा हो, तो उसके नेविगेशन सिस्टम में यह दिख सकता है कि वह चंडीगढ़ के ऊपर हैं.यानी विमान की पोज़िशनिंग डेटा पूरी तरह गड़बड़ा जाती है.

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