
'आर्टिफिशियल क्राउड', चोरी का फोन और सिम कार्ड से अंजाम देते थे ठगी, ओडिशा पुलिस ने किया पहाड़ी गैंग का भंडोफोड़
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पहाड़ी गैंग के सदस्यों के पास से 22 मोबाइल फोन, 25 सिम कार्ड, 20 मेमोरी चिप्स और 1.3 लाख रुपये नकद जब्त किए गए हैं. उन्होंने बताया कि आरोपियों द्वारा अब तक करीब 20 लाख रुपये की ठगी पता चला है.
मोबाइल फोन चुराने और फिर उनमें मौजूद सिम कार्ड का उपयोग करके पीड़ितों के खातों से पैसे ट्रांसफर करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का ओडिशा में भंडाफोड़ हुआ है. राज्य की पुलिस ने बुधवार को इस गैंग के आठ सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, 'पहाड़ी गिरोह, पेशेवर रूप से संचालित होता था. यह गैंग चोरी की वारदात को अंजाम देने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर कृत्रिम भीड़ इकट्ठी करता था. फोन चोरी करने के लिए चोरों को नौकरी रखता था और उन्हें 10,000 से 15,000 रुपये का मासिक वेतन देता था'.
पुलिस ने बताया कि ये चोर चोरी किए गए मोबाइल फोन को पहाड़ी गिरोह के सरगना को सौंप देते थे जो सिम कार्ड का इस्तेमाल कर पीड़ितों के खाते से ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर कर देता था. भुवनेश्वर के पुलिस कमिश्नर प्रतीक सिंह ने मीडिया को इस गैंग के बारे में जानकारी देते हुए कहा, 'पहाड़ी गिरोह हमारे रडार पर तब आया जब एक व्यक्ति ने कैपिटल पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया, जिसमें आरोप लगाया गया कि उससे 14 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई है'.
यह गिरोह देश के अधिकांश राज्यों में सक्रिय है
उन्होंने कहा, 'तब से, हम गिरोह के सदस्यों की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं. उन्हें गिरफ्तार करना एक चुनौतीपूर्ण काम था. क्योंकि गिरोह के सदस्य व्यक्तिगत रूप से काम करते थे और अक्सर अपने स्थान बदलते थे. यह गिरोह देश के अधिकांश राज्यों में सक्रिय है. वे सार्वजनिक बसों, व्यस्त बाजारों और त्योहारों के दौरान कृत्रिम भीड़ बनाकर लोगों से मोबाइल फोन चुराते हैं. इसके बाद चोरी किए गए मोबाइल के सिम कार्ड का उपयोग करके वे ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करते हैं'. पुलिस कमिश्नर प्रतीक सिंह ने बताया कि केवल भुवनेश्वर में नौ मामले सामने आए हैं.
पहाड़ी गैंग के सदस्यों के पास से 22 मोबाइल फोन, 25 सिम कार्ड, 20 मेमोरी चिप्स और 1.3 लाख रुपये नकद जब्त किए गए हैं. उन्होंने बताया कि आरोपियों द्वारा अब तक करीब 20 लाख रुपये की ठगी पता चला है. उन्होंने कहा, 'गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश के लिए जांच जारी है. हम तकनीकी पहलुओं से गिरोह की मदद करने वालों की भी तलाश कर रहे हैं'. दरअसल, शहरों में यह देखने को मिलता है कि ठगी करने वाले गिरोह सार्वजनिक स्थानों पर रेकी करते हैं. वे बड़ी संख्या (कृत्रिम भीड़) में बसों, बाजारों, चौराहों पर इकट्ठा होते हैं और फोन, पर्स, आभूषण इत्यादि पर हाथ साफ कर देते हैं.

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