
आज का दिनः सिखों के लिए हथियार की ट्रेनिंग क्यों चाहते हैं ज्ञानी हरप्रीत?
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ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार की बरसी पर अकाल तख्त के मुख्य जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने सिखों के लिए हथियारों की ट्रेनिंग की बात कही है. दूसरी तरफ बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा आज से पश्चिम बंगाल के दौरे पर जा रहे हैं.
सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या से शुरू हुई पंजाब में आक्रामक बयानबाजी तो चल ही रही थी, इस सिलसिले में एक और नया बयान और नया बवाल जुड़ गया. ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार की 38वीं बरसी पर अकाल तख्त के मुख्य जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने लोगों को संबोधित किया. अपने संबोधन में उन्होंने ब्ल्यू स्टार के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी और साथ ही पंडित जवाहरलाल नेहरू समेत कांग्रेस के कई नेताओं को जमकर कोसा. बात यहीं तक रहती तो ठीक थी. हरप्रीत ने कुछ ऐसी अपील कर दी जो पंजाब में शांति और खुशहाली चाहने वालों को चुभ सकती है.
ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि दिन प्रतिदिन हमें धार्मिक स्तर पर कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं. जरूरी ये है कि हम अपनी इस लड़ाई को लड़ें. हमें अपने बच्चों को मार्शल आर्ट्स और अत्याधुनिक हथियारों की ट्रेनिंग देनी होगी. ऐसे सेंटर बनाए जाएं जहां ये ट्रेनिंग दी जा सके. आगे हरप्रीत ने पंजाब के गांवों में चर्च की मौजूदगी पर भी सवाल उठा दिया. उन्होंने कहा कि ये हमें कमजोर करने की कोशिश है, सिखों को नींद से जगना पड़ेगा. हरप्रीत के इस बयान के बाद इसके अलग अलग मायने निकाले जाने लगे. कई नेताओं ने हरप्रीत के इस बयान का विरोध किया है. सवाल ये है कि उनकी ये अपील किस कंटेस्ट में थी, वो इन अपील्स के जरिये सिखों की किस कमजोरी की तरफ इशारा कर रहे थे? हाल ही में पंजाब ने एक बड़े सिंगर की खुलेआम हत्या देखी है, ऐसे में इस बयान का असर किस तरह हो सकता है?
क्यों लोकप्रियता खो रहे बोरिस जॉनसन?
विवादों में घिरे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हुई. ब्रिटेन के पीएम को उनके पद से हटाने के लिए लाया गया ये प्रस्ताव पास नहीं हो सका, जॉनसन ने कंफीडेंस वोट पाने की लड़ाई 63 वोट से जीत ली. उनके समर्थन में 211 वोट पड़े और खिलाफ में 148. इससे पहले जॉनसन की अपनी ही कंजरवेटिव पार्टी की एक समिति के अध्यक्ष ने जॉनसन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की घोषणा की थी.
ब्रिटेन की संसद में नो कंफीडेंस मोशन संबंधी पत्रों के प्रभारी सर ग्राहम ब्रैडी ने बताया था कि ‘टोरी’ संसदीय दल के 54 सांसद इसकी मांग कर रहे हैं. जिसके बाद ये नो कंफीडेंस मोशन की तारीख निर्धारित की गई थी. कहा जा रहा है जॉनसन जितने बड़े बहुमत के साथ सत्ता में आए, उतनी ही तेजी से उनका ग्राफ भी गिरा है. मामला यहां तक आ गया कि उनकी अपनी ही पार्टी में उनके खिलाफ बिगुल बज गया. ऐसी नौबत कैसे आई, बोरिस जॉनसन जो एक लोकप्रिय नेता थे, उनकी घटती लोकप्रियता के पीछे के कारण क्या रहे?
क्या है जेपी नड्डा के बंगाल दौरे का कार्यक्रम?

झारखंड के लातेहार जिले के भैंसादोन गांव में ग्रामीणों ने एलएलसी कंपनी के अधिकारियों और कर्मियों को बंधक बना लिया. ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी बिना ग्राम सभा की अनुमति गांव में आकर लोगों को ठगने और जमीन हड़पने की कोशिश कर रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप के बाद लगभग दो घंटे में अधिकारी सुरक्षित गांव से बाहर निकल सके.

दिल्ली के सदर बाजार में गोरखीमल धनपत राय की दुकान की रस्सी आज़ादी के बाद से ध्वजारोहण में निरंतर उपयोग की जाती है. प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के बाद यह रस्सी नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने लगी. इस रस्सी को सेना पूरी सम्मान के साथ लेने आती है, जो इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्ता को दर्शाता है. सदर बाजार की यह रस्सी भारत के स्वाधीनता संग्राम और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनी हुई है. देखिए रिपोर्ट.

संभल में दंगा मामले के बाद सीजेएम के तबादले को लेकर विवाद शुरू हो गया है. पुलिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए थे लेकिन पुलिस ने कार्रवाई नहीं की. इस पर सीजेएम का अचानक तबादला हुआ और वकील प्रदर्शन कर रहे हैं. समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है. इस विवाद में राजनीतिक सियासत भी जुड़ी है. हाई कोर्ट के आदेशानुसार जजों के ट्रांसफर होते हैं लेकिन इस बार बहस हुई कि क्या यहां राज्य सरकार ने हस्तक्षेप किया.

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महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों के बाद ठाणे जिले के मुंब्रा क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. एमआईएम के टिकट पर साढ़े पांच हजार से अधिक वोट के अंतर से जीत हासिल करने वाली सहर शेख एक बयान की वजह से चर्चा में हैं. जैसे ही उनका बयान विवादास्पद हुआ, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान धार्मिक राजनीति से जुड़ा नहीं था. सहर शेख ने यह भी कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है और वे उस तरह की राजनीति का समर्थन नहीं करतीं.








