
असम: सरायघाट की लड़ाई की याद में 17 नवंबर से होगा वाटर फेस्ट, अहोम सैनिकों ने मुगलों को दी थी करारी शिकस्त
AajTak
इस फेस्ट का दूसरा संस्करण सरायघाट युद्ध को श्रद्धांजलि होगी, जो 1671 की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है. जब जनरल लाचित बोरफुकन के नेतृत्व में बहादुर अहोम सेना ने ब्रह्मपुत्र नदी में मुगलों पर विजय प्राप्त की थी.
सरायघाट की लड़ाई, जिसमें अहोम सैनिकों ने मुगलों को करारी शिकस्त दी थी, उसकी याद में 17 नवंबर से गुवाहाटी के दीपोर बील लेक में वॉटर स्पोर्ट फेस्ट आयोजित किया जाएगा. असम सरकार ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि राष्ट्रीय स्तर के क्लब चार दिवसीय 'राइजिंग सन वॉटर फेस्ट- रिविजिटिंग सरायघाट' के दौरान दीपोर बील झील में नौकायन और रोइंग इवेंट में कम्पीट करेंगे.
इस आयोजन की ट्रॉफियों का अनावरण करते हुए, मंगलवार को असम की खेल मंत्री नंदिता गारोलोसा ने कहा कि यह राज्य के लिए अपने इतिहास के साथ-साथ पर्यटन क्षमता को प्रदर्शित करने का एक अच्छा मंच होगा. उन्होंने कहा, 'हम कार्यक्रम का इंतजार कर रहे हैं. हमें खुशी है कि मेघालय में पहले वॉटर फेस्ट के बाद इस बार इसे यहां आयोजित किया जा रहा है.' गारलोसा ने कहा कि इस इवेंट का मेन फोकस जल संरक्षण, दीपोर बील लेक का प्रचार करना और क्षेत्र में वॉटर स्पोर्ट और टूरिज्म की संभावनाओं को प्रदर्शित करना होगा.
मेघालय में आयोजित हुआ था पहला राइजिंग सन वॉटर फेस्ट
दीपोर बील असम का एक बारहमासी मीठे पानी की झील है, जो गुवाहाटी शहर से 10 किमी दक्षिण पश्चिम में स्थित है और अपनी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है. इसकी पहचान एक प्रमुख एलिफेंट कॉरिडोर के रूप में भी है.
असम सरकार और सेना के ईस्टर्न कमांड ने इस फेस्ट आयोजन के लिए पार्टनरशिप की है. इस वॉटर स्पोर्ट फेस्ट में स्पेशल फोर्सेज और इंडियन एयरफोर्स के सैनिक भी शिरकत करेंगे. राइजिंग सन वॉटर फेस्ट का पहला संस्करण पिछले साल मेघालय की उमियाम झील में आयोजित किया गया था.
1671 की एक ऐतिहासिक घटना है 'द बैटल ऑफ सरायघाट' इस फेस्ट का दूसरा संस्करण सरायघाट युद्ध को श्रद्धांजलि होगी, जो 1671 की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है. जब जनरल लाचित बोरफुकन के नेतृत्व में बहादुर अहोम सेना ने ब्रह्मपुत्र नदी में मुगलों पर विजय प्राप्त की थी. असम सरकार ने एक बयान में कहा, 'यह आयोजन सिर्फ खेलों के बारे में नहीं है, यह हमारे युवाओं को वॉटर स्पोर्ट को अपनाने के लिए प्रेरित करने और प्रतिस्पर्धा, समावेशिता और उत्कृष्टता की भावना का जश्न मनाने के बारे में है.'

पश्चिमी एशिया में युद्ध के बीच भारत की चिंताएं तेल और गैस सप्लाई को लेकर बढ़ी हुई हैं. प्रधानमंत्री ने ताजा हालात की जानकारी सदन में बोलते हुए देश को दी. अब आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कर्तव्य भवन-2 में अहम बैठक की है. करीब डेढ़ घंटे तक चली इस बैठक में CDS और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी मौजूद रहे, जिन्होंने होर्मुज से तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चर्चा की. देखें वीडियो.

पश्चिम एशिया के हालात सुधरते नहीं दिख रहे..ट्रंप ने ईरान के पावर प्लांट पर 5 दिनों तक हमला ना करने की हामी जरूर भरी है लेकिन अब भी हमले थमे नहीं है. पश्चिम एशिया के हालात को देखते हुए भारत ने भी अपनी तैयारी मुकम्मल कर रखी है. राजनाथ सिंह ने एक हाईलेवल मीटिंग बुलाकर तैयारी की समीक्षा की. तो भारतीय एलपीजी टैंकरों की सुरक्षा के लिए भारतीय युद्धपोत हॉर्मुज पहुंच चुके हैं. पीएम मोदी ने कल लोकसभा में साफ कह दिया था कि तेल सप्लाई में रुकावट या नागरिकों और पावर प्लांट पर हमला मंजूर नहीं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान जंग पर राज्यसभा में कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध को तीन हफ्ते से ज्यादा का समय हो चुका है. इसने पूरे विश्व को गंभीर ऊर्जा संकट में डाल दिया है. इसका असर भारत पर भी पड़ रहा है. गल्फ देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं. उनके जीवन की रक्षा भी भारत के लिए चिंता का विषय है. होर्मुज स्ट्रेट में बड़ी संख्या में जहाज फंसे हैं. उनके क्रू मेंबर्स भी अधिकतर भारतीय हैं. यह भी भारत के लिए चिंता का विषय है. ऐसे में जरूरी है कि भारत के इस उच्च सदन से दुनिया में संवाद का संदेश जाए. हम गल्फ के देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं. हम ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं. हमने डीएस्केलेशन और होर्मुज स्ट्रेट खोले जाने पर भी लगातार बात की है. भारत ने नागरिकों पर, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर पर, एनर्जी और ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का विरोध किया है.










