
अफ्रीकी देश Congo में विद्रोहियों ने मचाया कोहराम, 22 लोगों को मारकर 3 को ले गए अपने साथ
AajTak
अफ्रीकी देश कांगो में एक बार फिर उग्रवादियों ने बड़ी तादाद में लोगों को मौत के घाट उतार दिया है. चरमपंथियों ने कांगो के पूर्वी इटुरी और उत्तरी किवु प्रांत में सिलसिलेवार हमले किए. एक हमले में 12 तो वहीं दूसरे हमले 10 लोगों की मौत हो गई.
अफ्रीकी देश में कांगो में एक बार फिर विद्रोहियों ने कोहराम मचाया है. उन्होंने न सिर्फ 22 लोगों की जान ले ली. बल्कि, 3 लोगों का अपहरण कर उन्हें अपने साथ ले गए. जघन्य हत्याओं को आतंकियों ने दो अलग-अलग हमलों के दौरान अंजाम दिया है. बता दें कि कांगो में शांति स्थापित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना लगातार कोशिशें कर रही है. लेकिन इसके बाद भी आतंकी मौका देखकर किसी न किसी वारदात को अंजाम दे ही देते हैं.
एजेंसी के मुताबिक विद्रोहियों ने कांगो के पूर्वी इटुरी और उत्तरी किवु प्रांत में सिलसिलेवार हमले किए. शनिवार को आतंकियों ने इटुरी प्रांत के कई गांवों में एक साथ छापेमारी की. इस हमले में उन्होंने 12 लोगों को मौत के घाट उतार दिया. इस हमले के लिए स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने कोडेको समूह को दोषी ठहराया है. यह ग्रुप उग्रवादियों का एक संगठन है, जो जंगलों में रहते हैं और मौका मिलते ही छुपकर गांव वालों पर हमला करते हैं.
कोडेको एक मिलिशिया है, जो कांगो के कमजोर तबके के लोगों का नरसंहार करती है. उत्तरी किवु प्रांत के लुबेरो क्षेत्र के प्रशासक कर्नल एलेन किवेवा ने बताया कि माउंट क्याविरिमु के नगुली गांव में आतंकवादियों ने 10 लोगों की हत्या कर दी. यहां से आतंकी तीन लोगों का अपहरण कर उन्हें अपने साथ ले गए.
कर्नल एलेन ने पूर्वी कांगो में स्थित युगांडा के एक सशस्त्र समूह एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्सेस (ADF) पर हमले को अंजाम देने का आरोप लगाया. उन्होंने बताया कि इस ग्रुप ने इस्लामिक स्टेट के प्रति निष्ठा रखने की प्रतिज्ञा की है. इस समूह ने विरुंगा नेशनल पार्क में कब्जा जमा रखा है.
बता दें कि कांगो में विद्रोही इस तरह के हमले करते रहते हैं. मई 2022 में विद्रोहियों ने संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना के भारतीय जवानों पर हमला कर दिया था. यह हमला अचानक किया गया था. हमले के दौरान विद्रोहियों ने गोलाबारी की थी और संयुक्त राष्ट्र और कांगो आर्मी के ठिकानों पर कब्जा करने की कोशिश की थी.
इस दौरान MONUSCO में भारतीय सेना की एक टुकड़ी भी शांति-मिशन के तहत शामिल थी. जैसे ही हमला हुआ भारतीय सैनिकों ने ना केवल डटकर मुकाबला किया बल्कि विद्रोहियों को खदेड़ भी दिया था. इस जवाबी कारवाई में भारतीय सेना की मदद, दूसरे देशों के सैनिकों ने भी की थी, जो इस शांति मिशन का हिस्सा हैं. MONUSCO के मुताबिक, विद्रोहियों के खिलाफ दो अटैक हेलीकॉप्टर का भी इस्तेमाल किया गया था.

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद जायेद अल नहयान के भारत दौरे ने पाकिस्तान में फिर से पुरानी डिबेट छेड़ दी है. पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की वजह से हमें भारत की तुलना में हमेशा कमतर आंका जाता है. पाकिस्तान में इस दौरे को मिडिल ईस्ट मे पैदा हुए हालात और सऊदी अरब -पाकिस्तान के संबंधों के बरक्श देखा जा रहा है.

यूरोप में कुछ बेहद तेजी से दरक रहा है. ये यूरोपीय संघ और अमेरिका का रिश्ता है, जिसकी मिसालें दी जाती थीं. छोटा‑मोटा झगड़ा पहले से था, लेकिन ग्रीनलैंड ने इसे बड़ा कर दिया. डोनाल्ड ट्रंप लगातार दोहरा रहे हैं कि उन्हें हर हाल में ग्रीनलैंड चाहिए. यूरोप अड़ा हुआ है कि अमेरिका ही विस्तारवादी हो जाए तो किसकी मिसालें दी जाएंगी.

डोनाल्ड ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जा चाहते हैं. उनका मानना है कि डेनमार्क के अधीन आने वाला यह अर्द्ध स्वायत्त देश अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी है. इसे पाने के लिए वे सैन्य जोर भी लगा सकते हैं. इधर ग्रीनलैंड के पास सेना के नाम पर डेनिश मिलिट्री है. साथ ही बर्फीले इलाके हैं, जहां आम सैनिक नहीं पहुंच सकते.

गुरु गोलवलकर मानते थे कि चीन स्वभाव से विस्तारवादी है और निकट भविष्य में चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने की पूरी संभावना है. उन्होंने भारत सरकार को हमेशा याद दिलाया कि चीन से सतर्क रहने की जरूरत है. लेकिन गोलवलकर जब जब तिब्बत की याद दिलाते थे उन्हों 'उन्मादी' कह दिया जाता था. RSS के 100 सालों के सफर की 100 कहानियों की कड़ी में आज पेश है यही कहानी.









