
अफगानिस्तान ही नहीं भारत के लिए भी खतरा बन रहा IS खुरासान, जानिए तालिबान से अदावत की कहानी
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ISIS खुरासान, ISIS का ही हिस्सा है, जिसे अफगानिस्तान-पाकिस्तान के आतंकवादी चलाते हैं. इसका मुख्यालय अफगानिस्तान के ही नांगरहार राज्य में है जो पाकिस्तान के बेहद नजदीक है. यूएन का दावा है कि ISIL-K के पास 1000-3000 लड़ाके हैं. इनमें से करीब 200 सेंट्रल एशिया में हैं. हालांकि, कुछ देशों का मानना है कि यह संख्या 6000 तक है.
अफगानिस्तान के मजार ए शरीफ शहर में गुरुवार को बम ब्लास्ट हुआ था. इस हमले में तालिबानी गवर्नर दाऊद मुजमल समेत 3 लोगों की मौत हो गई. इस हमले के पीछे इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISIS- khorasan) का हाथ बताया जा रहा है. तालिबान के कब्जे के बाद से खुरासान लगातार अफगानिस्तान में आतंकी हमलों को अंजाम दे रहा है. इतना ही नहीं खुरासान ने हाल ही में दावा किया है कि भारत में कोयम्बटूर और मंगलुरु में हुए विस्फोट में भी उसी का हाथ था. आईए जानते हैं कि IS खुरासान क्या है और इसकी तालिबान से क्या दुश्मनी है?
क्या है ISIS खुरासान?
ISIS खुरासान, ISIS का ही हिस्सा है, जिसे अफगानिस्तान-पाकिस्तान के आतंकवादी चलाते हैं. इसका मुख्यालय अफगानिस्तान के ही नांगरहार राज्य में है जो पाकिस्तान के बेहद नजदीक है. तालिबानी कमांडर मुल्ला उमर की मौत के बाद तालिबान के बहुत से खूंखार आतंकवादी ISIS खुरासान में शामिल हो गए. इस तरह ये तालिबान से ही निकला ग्रुप कहा जा सकता है.
क्या है ISIS खुरासान का मकसद?
ISIS खुरासान का मकसद खुरासान राज्य की स्थापना करना है. ISIS खुरासान की अमेरिका से दुश्मनी क्यों और कैसे शुरू हुई. ये समझने से पहले आपको फारसी शब्द खुरासान को समझना होगा, जिसका मतलब होता है, जहां से सूरज उगता है. तीसरी-चौथी सदी में अरब से निकले लोग आज के ईरान पहुंचे और जहां वो आबाद हुए उसका नाम खुरासान पड़ा. इसका दायरा बढ़ता गया और वो एक बड़ी शक्ति के रूप में उभरा.
SIS खुरासान के नक्शे में भारत के भी राज्य

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