
अगर अरविंद केजरीवाल दूसरे समन पर भी नहीं आए तो क्या होंगे ED के पास विकल्प?
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ईडी के समन पर सीएम केजरीवाल के कड़े जवाब के बाद अब चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि ईडी का अगला कदम क्या होगा? ईडी के दूसरा समन जारी करने की बात सामने आ रही है, लेकिन इसी के साथ गिरफ्तारी की चर्चा भी चल रही है. कहा जा रहा है कि सीएम अगर ईडी के सामने पेश नहीं होते हैं तो ईडी अपनी ताकत का इस्तेमाल कर सकती है.
दिल्ली की शराब नीति में कथित घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को नोटिस भेजकर आज पूछताछ के लिए बुलाया था. हालांकि, केजरीवाल आज ईडी के सामने पेश नहीं होंगे. उन्होंने ईडी को जवाब लिखकर जांच एजेंसी के नोटिस को राजनीति से प्रेरित और गैर कानूनी बताया. दरअसल, ईडी शराब नीति घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की जांच कर रही है. चर्चा है कि जांच एजेंसी ने केजरीवाल को तलब करने से पहले सबूतों को इकट्ठा किया है. इस मामले में जांच एजेंसी पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और राज्यसभा सांसद संजय सिंह को गिरफ्तार कर चुकी है.
क्या होगा ईडी का अगला कदम? ईडी के समन पर सीएम केजरीवाल के कड़े जवाब के बाद अब चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि ईडी का अगला कदम क्या होगा? ईडी के दूसरा समन जारी करने की बात सामने आ रही है, लेकिन इसी के साथ गिरफ्तारी की चर्चा भी चल रही है. कहा जा रहा है कि सीएम अगर ईडी के सामने पेश नहीं होते हैं तो ईडी अपनी ताकत का इस्तेमाल कर सकती है. समन पर न पहुंचने पर क्या ईडी केजरीवाल को गिरफ्तार कर सकती है? इन सवालों का जवाब ईडी की ताकत और उसे दिए गए अधिकारों में छिपा है.
क्या है ईडी, कैसे करती है काम? ईडी, एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट या प्रवर्तन निदेशालय. यह वित्त मंत्रालय के अधीन काम करने वाली एक सरकारी एजेंसी है, जिसे खासतौर पर वित्तीय गबन या धोखाधड़ी की जांच करने वाली एक केंद्रीय एजेंसी के तौर पर जाना जाता है. यही जांच इस निदेशालय का प्रमुख कार्य भी है. आजादी के बाद साल 1947 में, फॉरेन एक्सचेंज रेगुलेशन एक्ट (विदेशी मुद्रा नियमन कानून) बनाया गया था, जिसपर वित्त मंत्रालय के डिपार्टमेंट ऑफ इकनॉमिक अफेयर्स का कंट्रोल था. साल 1956 में प्रवर्तन इकाई बनी. इसी में इकनॉमिक अफेयर्स डिपार्टमेंट बना. साल 1957 में इसका नाम बदलकर डायरेक्टोरेट ऑफ एनफोर्समेंट या एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट रखा गया, जो ED कहलाने लगा. साल 1960 में ED को रेवेन्यू डिपार्टमेंट में शिफ्ट कर दिया गया और तब से यह उसी में काम कर रहा है.
कब सक्रिय होती है ईडी? ईडी, फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (Fema) के तहत कार्रवाई करती है. इसके साथ ही आपराधिक श्रेणी वाले फाइनेंशियल फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले भी देख रही है. ईडी खािसतौर पर प्रीवेंशन आफ मनी लांड्रिंग एक्ट 2002 के तहत कार्रवाई करती है. साल 2018 जब सरकार ने देखा कि आर्थिक अपराधी काफी संख्या में देश से बाहर भाग रहे हैं तो फ्यूजिटिव ऑफेंडर एक्ट लाया गया, इसे भी ईडी के तहत रखा गया. विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 (FEMA. धन सोधन निवारण अधिनियम 2002 (PMLA). भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम 2018 (FEOA). FEMA के तहत ईडी फॉरेन एक्सचेंज नियमों के उल्लंघन की जांच करता है.
ईडी के पास अधिकार, कभी भी कर सकती है गिरफ्तार एजेंसी के पास मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपियों के खिलाफ संपत्ति और उनके धन को जब्त करने-गिरफ्तारी करने के अधिकार हैं. ईडी गैरकानूनी वित्तीय कार्यों पर कार्रवाई कर सकती है. पीएमएलए के तहत ईडी को संपत्ति जब्त करने, छापा मारने और गिरफ्तारी का अधिकार है. ईडी की ताकत अंदाजा इससे भी लगा सकते हैं कि एजेंसी पूछताछ के बिना भी संपत्ति जब्त कर सकती है.
हेमंत सोरेन को तो पांच बार भेजा है ईडी ने नोटिस झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन को ईडी ने अब तक पांच बार समन भेज दिया है, लेकिन वह अभी तक पेश नहीं हुए हैं. बल्कि जब सोरेन को 14 अगस्त का समन भेजा गया था तो उन्होंने इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी. रांची भूमि घोटाला में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच कर रही ईडी सीएम सोरेन को बार-बार समन भेजकर पूछताछ के लिए बुला रही है, लेकिन वह इसे गैर कानूनी बताते हुए हाजिर नहीं हो रहे है. हेमंत सोरेन ने झारखंड हाई कोर्ट से इस ईडी के बार-बार समन भेजने को कष्टकारी कहा था, और इस पर रोक लगाने का आग्रह किया था. असल में पहले वह सुप्रीम कोर्ट चले गए थे, लेकिन वहां उनसे हाई कोर्ट में अपील करने को कहा गया था. उन्होंने कोर्ट में बताया था कि उन्हें केंद्र के इशारे पर ईडी परेशान कर रही है. पहले उन्होंने ईडी को जांच में सहयोग किया था और ईडी कार्यालय गए भी थे. उन्होंने ईडी को अपने आय-व्यय का पूरा ब्यौरा भी सौंपा था. इसके बावजूद ईडी उन्हें दूसरे-दूसरे मामलों में समन कर परेशान कर रही है.

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