
UP: फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे बने ग्राम प्रधान, ऐसे खुली पोल
AajTak
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे ग्राम प्रधान बने दो प्रधानों के खिलाफ एक्शन लिया गया है. इन पर आरोप है कि इन प्रधानों ने फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के सहारे ये चुनाव जीते थे.
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे ग्राम प्रधान बने दो प्रधानों के खिलाफ एक्शन लिया गया है. इन पर आरोप है कि इन प्रधानों ने फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के सहारे ये चुनाव जीते थे.जबकि ये अनुसूचित जाति की श्रेणी में नही आते. दो लोगों के जाति प्रमाणपत्र निरस्त किये गए हैं. दो लेखपालों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है, एक लेखपाल को निलंबित कर दिया गया, इस प्रकरण के बाद कई ग्राम प्रधानों के खिलाफ भी जांच की जा रही है. राजाबाबू ने मैनपुरी जनपद की अरसारा ग्राम पंचायत से आवेदन किया था. अरसारा ग्राम पंचायत की प्रधान पद की सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी. आरोप है कि राजाबाबू ने भी अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाया और चुनाव मैदान में ताल ठोक दी फिर 50 से ज्यादा मतों से वो जीत भी गए.
आज जब वक्त इतना कीमती हो गया है कि लोग हरेक चीज की दस मिनट में डिलीवरी चाहते हैं. वहीं दूसरी तरफ विडंबना ये है कि भारत का एक शहर ऐसा है जहां इंसान को कहीं जाने के लिए सड़कों पर ट्रैफिक में फंसना पड़ता है. यहां हर साल औसतन 168 घंटे लोग ट्रैफिक में फंसे रहते हैं. यानी पूरे एक हफ्ते का समय सिर्फ ट्रैफिक में चला जाता है.

जिस शहर की फायरब्रिगेड के पास छोटे से तालाब के पानी से एक शख्स को निकालने के लिए टूल नहीं है, वह किसी बड़े हादसे से कैसे निबटेगा. युवराज मेहता की मौत ने नोएडा की आपदा राहत तैयारियां की कलई खोल दी है. सवाल यह है कि जब नोएडा जैसे यूपी के सबसे समृद्ध शहर में ये हालात हैं तो बाकी शहर-कस्बों की स्थिति कितनी खतरनाक होगी.

दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता में सुधार के कारण कमीशन ऑफ एयर क्वालिटी इंप्रवूमेंट (CAQM) ने GRAP-3 पाबंदियां हटा दी हैं. AQI में सुधार के चलते अब कंस्ट्रक्शन और आवाजाही पर लगी पाबंदियों में राहत मिली है. IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में AQI 'एवरेज' से 'खराब' श्रेणी में रह सकता है, जिसके कारण GRAP-3 के तहत गंभीर पाबंदियां लागू नहीं की जाएंगी.

AIMIM प्रवक्ता वारिस पठान ने स्पष्ट किया है कि मुसलमानों ने अब फैसला कर लिया है कि वे अब किसी भी ऐसे व्यक्ति को समर्थन नहीं देंगे जो केवल जातीय विभाजन करता है, बल्कि वे उस नेता के साथ जाएंगे जो विकास की बात करता है. उनका यह बयान समाज में सकारात्मक बदलाव और विकास को प्राथमिकता देने की दिशा में है. मुसलमान अब ऐसे नेताओं के साथ खड़े होंगे जो उनकी बेहतरी और समाज के समग्र विकास के लिए काम करें.









